महरौनी तहसील के प्राचीन अतिशय क्षेत्र नवागढ़ जैन तीर्थ में तीन दिनों तक चले भक्ति-आध्यात्मिक महोत्सव का रविवार को समापन हुआ। 20 फरवरी से चल रहे कार्यक्रम में स्थानीय सहित दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने भाग लेकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक श्रद्धा-परंपरा के रूप में सफल बनाया। महरौनी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर…
महरौनी (ललितपुर)। महरौनी तहसील के प्राचीन अतिशय क्षेत्र नवागढ़ जैन तीर्थ में तीन दिनों तक चले भक्ति-आध्यात्मिक महोत्सव का रविवार को भव्य समापन हुआ। 20 फरवरी से चल रहे कार्यक्रम में स्थानीय सहित दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने भाग लेकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक श्रद्धा-परंपरा के रूप में सफल बनाया।
नवागढ़ जैन तीर्थ पौराणिक व ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है, जहाँ भगवान अरहनाथ की प्राचीन मूर्ति भूमिगत कक्ष में संरक्षित है और यह अपने अटूट विश्वास, चमत्कारों एवं धार्मिक महत्ता के लिए स्पष्ट रूप से प्रसिद्ध है। यह भारत का एकमात्र तीर्थ स्थल है, जहाँ 12वीं सदी की अत्यंत कलात्मक जीवन-आकार प्रतिमा गर्भगृह में स्थापित है, जिसे श्रद्धालु अत्यंत श्रद्धा के साथ पूजते हैं। समापन दिवस पर मूलनायक अरनाथ का महामस्ताभिषेक, शांतिधारा, अभिषेक, पूजा एवं विधान का भव्य आयोजन हुआ।
इसके बाद पूज्य संत मुनिश्री समत्व सागर जी और मुनिश्री सौम्य सागर जी ससंघ द्वारा धर्मचर्चा और मंगल प्रवचन भी पेश किए गए। जिनमें जीवन में सदाचार, साधना एवं संयम के महत्व पर बल दिया गया। श्रद्धालुओं द्वारा किए गए कलश अभिषेक, आरती और भजन-कीर्तन ने पूरा वातावरण श्रद्धा एवं भक्ति से परिपूर्ण कर दिया। आयोजन के दौरान विशेष रूप से प्रभात फेरी, भजन संध्या और साधु-संतों के प्रवचन कार्यक्रम भी किए गए। स्थानीय आयोजन समिति के संयोजकों ने कहा कि तीर्थ की महिमा एवं इतिहास ने इंसानों के मन में आध्यात्मिक जागृति पैदा की है और यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए स्मरणीय बनकर रहेगा। महोत्सव के समापन अवसर पर प्रतिष्ठाचार्य जय निशांत ने सभी भक्तों तथा सहयोगियों का धन्यवाद किया गया।











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