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जीवन में जो समता धारण करते वही संत और श्रावक : आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी का जयपुर में हुआ मंगल प्रवेश   


आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज ससंघ का रविवार सुबह 8 बजे जयपुर में मंगल प्रवेश हुआ। महाराज श्री अग्रवाल कॉलेज सांगानेरी गेट, जोहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार, चौड़ा रास्ता, न्यू गेट होते हुए रामनिवास बाग स्थित यूनियन क्लब फुटबॉल ग्राउंड पहुंचे। जयपुर से पढ़िए, यह खबर… 


  जयपुर। आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज ससंघ का रविवार सुबह 8 बजे जयपुर में मंगल प्रवेश हुआ। महाराज श्री अग्रवाल कॉलेज सांगानेरी गेट, जोहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार, चौड़ा रास्ता, न्यू गेट होते हुए रामनिवास बाग स्थित यूनियन क्लब फुटबॉल ग्राउंड पहुंचे।राजस्थान जैन सभा के सुभाष जैन, विनोद कोटखावदा, कैलाश जैन छाबड़ा, जुलूस संयोजक राकेश गोधा के नेतृत्व में ऐतिहासिक जुलूस निकाला गया। इस अवसर पर धर्मसभा में आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी ने कहा कि जीवन जीना सीखना चाहिए। जीवन में समता का भाव रखना चाहिए, जो समता धारण करते हैं वही संत और श्रावक हैं। पुण्य का पैसा पुण्य में ही लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन अनमोल है, जिन्होंने मानव जीवन प्राप्त किया है, उसका कोई मोल नहीं है, वह अनमोल है। जिन्होंने जैन कुल में जन्म लिया, उनका जीवन बेहद अनमोल है।

माता-पिता, गुरु और परमात्मा का उपकार माने

आचार्य श्री ने कहा कि मैं जयपुर महानगर में मन के मैल को धोने आया हूं चारित्र शुद्धि विधान के माध्यम से। उन्होंने कहा कि आप अपने जीवन में किसी की शिकायत नहीं करेंगे और किसी से कुछ नहीं मांगेंगे तो अपना जीवन धन्य होगा। आचार्य श्री ने कहा कि प्रातः उठते ही सर्वप्रथम किसान, सैनिक, माता-पिता, गुरु और परमात्मा को धन्यवाद करना चाहिए। जिनके उपकारों से हम अपना जीवन संपन्नता से जी रहे हैं।

चारित्र शुद्धि विधान की दी जानकारी 

धर्मसभा को उपाध्याय श्री पियूष सागर जी महाराज, मुनिश्री सहज सागर जी महाराज ने भी संबोधित किया और उन्होंने चारित्र शुद्धि विधान के बारे में बताया। यह विधान 25 से 31 जनवरी तक वीटी रोड मानसरोवर ग्राउंड में हो रहा है। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने बताया कि जुलूस में जयपुर महानगर की विभिन्न कॉलोनियों से पुरुष-महिला बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

जनकपुरी जैन मंदिर की ओर विहार 

ऐतिहासिक शोभायात्रा में 1251 महिलाएं मंगल कलश मंगल लेकर चल रही थीं। जुलूस में बैंडबाजों भटिंडा के बैंडबाजे के साथ स्थान-स्थान पर पुष्प वृष्टि एवं श्रावकों ने पाद् प्रक्षालन कर संतों की मंगल आरती की। आचार्य श्री ने गांधीनगर की ओर विहार किया। जहां आईएएस कुलदीप रांका ने अगवानी की। आहारचर्या, भी यहीं हुईं। प्रवास गांधीनगर में रहा। आचार्य श्री ने संघ सहित सोमवार सुबह जनकपुरी जैन मंदिर की ओर विहार किया। संचालन ब्र. तरुण भैय्याजी ने किया।

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