भारत सरकार ने 15 मुस्लिम देशों को हलाल मांस का निर्यात करने का निर्णय लिया है। इस संदर्भ में विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने एक अधिसूचना जारी की है, जिसके अनुसार हलाल मांस का निर्यात 16 अक्टूबर से शुरू होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने यह महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किया है, जिसके तहत 15 मुस्लिम बहुल देशों को हलाल-प्रमाणित मांस और मांस उत्पादों का निर्यात किया जाएगा। जैन समाज ने इसका विरोध किया है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। भारत सरकार ने 15 मुस्लिम देशों को हलाल मांस का निर्यात करने का निर्णय लिया है। इस संदर्भ में विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने एक अधिसूचना जारी की है, जिसके अनुसार हलाल मांस का निर्यात 16 अक्टूबर से शुरू होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने यह महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किया है, जिसके तहत 15 मुस्लिम बहुल देशों को हलाल-प्रमाणित मांस और मांस उत्पादों का निर्यात किया जाएगा।
हालांकि, यह कदम कई चर्चाओं और विवादों को जन्म देता है, क्योंकि भारत में हलाल प्रमाणन को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। इन उत्पादों को ‘भारत अनुरूपता मूल्यांकन योजना (I-CAS) हलाल’ प्रमाणन का पालन करना होगा, जिसकी निगरानी भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) द्वारा की जाएगी। इस निर्णय पर सिवनी, मध्य प्रदेश की दिगंबर जैन पंचायत कमेटी के अध्यक्ष पवन दिवाकर जैन ने कड़ा ऐतराज जताते हुए सरकार से पुनर्विचार की मांग की है। वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन, महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल, फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश विनायका, मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू, और अन्य समाजजन जैसे हंसमुख गांधी, टीके वेद, प्रदीप बडजात्या, अशोक मेहता, कांतिलाल बंम, भुपेंद्र जैन, कमल जैन, महिला संगठन की अध्यक्ष मुक्ता जैन, सारिका जैन, और फेडरेशन की राष्ट्रीय संरक्षिका पुष्पा कासलीवाल ने सरकार के इस कदम को निंदनीय बताया और इस पर पुनर्विचार करने का निवेदन किया।













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