शलाका पुरुषों में श्री शांतिनाथ भगवान कामदेव, चक्रवती और तीर्थंकर तीन पद के धारी हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दिगम्बर अतिशय क्षेत्र सहस्त्रकूट विज्ञा तीर्थ में प्रवेश के अवसर पर हुई धर्मसभा में प्रकट की। निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…
निवाई/जयपुर। श्रीमद जैनधर्म श्री से बना है। श्री का आशय केवल ज्ञान रूपी लक्ष्मी से है। इस तीर्थ में आज आगमन हुआ और श्री शांतिनाथ भगवान के दर्शन कर मन हर्षित हुआ। शलाका पुरुषों में श्री शांतिनाथ भगवान कामदेव, चक्रवती और तीर्थंकर तीन पद के धारी हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दिगम्बर अतिशय क्षेत्र सहस्त्रकूट विज्ञा तीर्थ में प्रवेश के अवसर पर हुई धर्मसभा में प्रकट की। आचार्य श्री ने उपदेश में कहा कि जब श्रावक कष्ट में होता है, उसका मन अशांत होता है तब गुरु उन्हें श्री शांतिनाथ भगवान की पूजन और विधान करने की प्रेरणा उपदेश देते हैं। विज्ञाश्री माताजी की वाणी का प्रभाव है कि उन्होंने जंगल में तीर्थ का निर्माण कराया है,तीर्थ का निर्माण महत्वपूर्ण है, समाज साधु की प्रेरणा से तीर्थ का निर्माण और संचालन करते हैं। जिस क्षेत्र में समाज एक नहीं होती है उस कारण साधु वहां रुकते हैं।
प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ द्वारा धर्म का प्रवर्तन हुआ
1008 श्री शांतिनाथ भगवान के पूर्व प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ द्वारा धर्म का प्रवर्तन हुआ। श्री शांतिनाथ भगवान के पूर्व धर्म प्रवर्तन रुक गया और खंडित हुआ किंतु, 1008 श्री शांतिनाथ भगवान के समय से यह धर्म प्रवर्तन निरंतर चल रहा है। वर्तमान शासन श्री महावीर भगवान का है। संघ को पदमपुरा पंच कल्याणक के लिए समय पर पहुंचना है। एक संयोग है कि 24 फरवरी 1969 फाल्गुन शुक्ला अष्टमी को तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी आचार्य पद दिया गया और उसी दिन हमारी भी दीक्षा हुई।
गुणानुवाद कार्यक्रम में शामिल होने की प्रेरणा
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने सभी को पदमपुरा पंच कल्याणक और 24 फरवरी को बूंदी जिले के आचार्य श्री धर्म सागर जी की गुणानुवाद कार्यक्रम में शामिल होने की प्रेरणा दी। धार्मिक कार्यक्रमों से पुण्य में वृद्धि होती हैं। आगामी चातुर्मास वर्ष 2026 के लिए किशनगढ़, निवाई, जयपुर,सीकर सहित अनेक नगरों ने प्रार्थना की हैं समय पर निर्णय लेंगे।
रात्रि विश्राम विज्ञा श्री तीर्थ गुनसी में हुआ
परमीत,पवन बोहरा, मोहित चांवरिया,हेमंत ने बताया कि आचार्य श्री के मंगल बिहार में पदमपुरा कमेटी, निवाई, टोंक और निकट के समाजजन चल रहे हैं। 3 फरवरी को ग्राम मुंडिया में आहार के बाद दोपहर को विहार कर रात्रि विश्राम विज्ञा श्री तीर्थ गुनसी में हुआ। 4 फरवरी को प्रातः 4 किमी विहार कर आहार चर्या शर्मा धर्मकांटा वेयर हाउस कोठून में होगी।













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