समाज के पदाधिकारियों ने सात्विक एग्रो फूड्स, दलपतपुरा, सीहोर पहुंच कर मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज का इंदौर में चातुर्मास हो, और इंदौर में प्रवेश की तारीख सुनिश्चित हो इस हेतु श्रीफल समर्पित किये। मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने संघ से सलाह करके जैसे ही 17 जुलाई 2024 को इंदौर प्रवेश करने की बात कही, सभी पदाधिकारियों में हर्ष की लहर दौड़ गई। पढ़िए सतीश जैन की रिपोर्ट..
इंदौर। मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ के इंदौर में चातुर्मास के लिए प्रवेश की तारीख 17 जुलाई निश्चित हुई। यह सुनकर पूरे जैन समाज में हर्ष की लहर दौड़ गई। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद इंदौर के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी एवं प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि समाज के पदाधिकारियों ने सात्विक एग्रो फूड्स, दलपतपुरा, सीहोर पहुंच कर मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज का इंदौर में चातुर्मास हो, और इंदौर में प्रवेश की तारीख सुनिश्चित हो इस हेतु श्रीफल समर्पित किये। मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने संघ से सलाह करके जैसे ही 17 जुलाई 2024 को इंदौर प्रवेश करने की बात कही, सभी पदाधिकारियों में हर्ष की लहर दौड़ गई।
सामाजिक संसद के पदाधिकारी पूर्व में भी दो बार विदिशा व भोपाल में इंदौर चातुर्मास का निवेदन करने हेतु पहुंचे थे। आज तीसरी बार में प्रयास सफल हुआ इसकी सबको खुशी है। गुणायतन प्रणेता, भावना योग प्रवर्तक, शंका समाधान के जनक, मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज का चातुर्मास भी इंदौर में हो, इस हेतु पूरा इंदौर जैन समाज प्रयासरत था। शंका समाधान कार्यक्रम में इंदौर के जैन समाज के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी, एम के जैन, नवीन गोधा, अमित कासलीवाल, विमल अजमेरा, राजेश जैन लॉरेल, हंसमुख गांधी, विपुल बांझल, दिलीप पाटनी, शेखर छाबड़ा आदि ने अपनी-अपनी शंकाएं रखीं, जिसका समाधान मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने शीघ्र ही बता दिया।
मुनिवर हर शंका का त्वरित समाधान बता देते हैं, वे इसके लिए प्रसिद्ध भी हैं। मुनि श्री के संघ में इस समय मुनि श्री निर्वेग सागर जी एवं मुनि श्री सन्धान सागर जी महाराज के साथ ही बाल ब्रह्मचारी अभय भैया जी भी मंच पर विराजमान थे। इस अवसर पर मुकेश पाटोदी, डी के जैन (रिटायर्ड डीएसपी), विजय काला, सतीश जैन, रितेश पाटनी, संजय जैन अहिंसा,अजय जैन, भूपेंद्र जैन, विनोद जैन, डॉक्टर जैनेंद्र जैन,विजय काला,योगेंद्र काला, नवनीत जैन, विशाल जैन, मनमोहन झांझरी, दीपक पाटनी आदि विशेष रूप से मौजूद थे।













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