साइंस ऑफ लिविंग के सत्र में मुनिश्री निरंजन सागर महाराज ने सेल्फ मोटिवेशन अर्थात् आत्म अभिप्रेरणा का सेल्फ सेटिस्फेक्शन अर्थात् आत्म सन्तुष्टि का मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा मोटिवेशनल फैक्टर है। जो जितना अपने जीवन में सहनशील है, वह उतना ही अपने जीवन मे सन्तुष्ट है, सफल है। पढ़िए संजय जैन हटा और राजेश रागी बकस्वाहा की यह रिपोर्ट…
हटा। साइंस ऑफ लिविंग के सत्र में मुनिश्री निरंजन सागर महाराज ने सेल्फ मोटिवेशन अर्थात् आत्म अभिप्रेरणा का सेल्फ सेटिस्फेक्शन अर्थात् आत्म सन्तुष्टि का मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि आपकी अपनी सहनशीलता ही आपके जीवन का सबसे बड़ा मोटिवेशनल फैक्टर है। जो जितना अपने जीवन में सहनशील है, वह उतना ही अपने जीवन मे सन्तुष्ट है, सफल है। क्योंकि कहा जाता है कि जहां सन्तुष्टि है वहां सफलता है। आपने अपने जीवन की विपत्ति को सम्पत्ति क्यों नहीं माना ? इतिहास साक्षी है कि जिस किसी भी महापुरुष ने अपने जीवन में आयी विपत्ति को बिना आपत्ति स्वीकार किया है, उसका सहर्ष सामना किया है, उसे सहन किया है, वह विपत्ति उन महापुरुषों के लिये सम्पत्ति का काम कर गयी अर्थात् उन महापुरुषों ने उस विपत्ति को किस धीरता के साथ सहन किया।
विपत्ति में न हों निराश
ध्यान रखना दूध फटने पर वे लोग निराश नहीं होते, ना ही कभी उदास होते हैं, जिन्हें रसगुल्ले बनाना आता है। विपत्ति में धैर्य, अभ्युदय में क्षमा, सभा में वाक्पटुता, युद्ध में विक्रम, यश में अभिरुचि और ज्ञान का व्यसन, ये महापुरुषों के स्वाभाविक गुण हैं। किसी विद्वान ने कहा है कि दु:ख में घबराओ मत और सुख में कभी इतराओ मत। दुःख किसे नहीं आता। महापुरुषों ने भी अपने जीवन मे दुःख को दुःख मानकर सहनशक्ति के बल पर सहन किया है और परिणाम यह निकला कि वही दुःख भी उनके लिये सुख में परिवर्तित हो गया। सज्जनों का धन तो धैर्य ही है। जिसके पास धैर्य है, वह जो भी इच्छा करता है, प्राप्त कर सकता है। अपने धैर्य के बिना और कोई संकट से मनुष्य का उद्धार नहीं कर सकता। संकट के समय धैर्य धारण करना मानो आधी लड़ाई जीत लेना है। जो व्यक्ति स्वभाव से धैर्यवान है, वह महान है।













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