मुनिश्री सारस्वतसागरजी महाराज के प्रवचनों को सुनने के लिए दूर-दराज से धर्मानुरागी यहां पहुंच रहे हैं। यहां पर मुनिराजों के चातुर्मास से धर्म प्रभावना की धारा अविरल बह रही है। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
नांद्रे। मुनिश्री सारस्वतसागरजी महाराज के प्रवचनों को सुनने के लिए दूर-दराज से धर्मानुरागी यहां पहुंच रहे हैं। यहां पर मुनिराजों के चातुर्मास से धर्म प्रभावना की धारा अविरल बह रही है। विदित है कि पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्रुतसागरजी महाराज भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। इनके प्रवचनों का धर्मलाभ श्रद्धालु और गुरु भक्त ले रहे हैं। मुनि श्री सारस्वत सागरजी महाराज ने नांद्रे में अपने प्रवचन में कहा कि प्रकृति से जुडे हुए जितने भी तत्व हैं, सब आपके जीवन का उपकार करते हैं। ऐसा एक भी तत्व नहीं जो आपके जीवन का उपकार न करते हों।
जितनी विशाल दृष्टि होगी उतना उपकारी को पहचानने की दृष्टि मिलेगी। जन्म से लेकर मृत्यु तक आपके जीवन को व्यवस्थित रखने में अनेक तत्व का समावेश होता है। जिसमें जड़ तत्व भी हैं तो चेतन तत्व भी हैं। जितने तत्वों ने हमारा उपकार किया हैं, हमें उन सबको धन्यवाद, साधुवाद करना चाहिए। उपकारी व्यक्ति अहंकार नहीं करता। उपकारी व्यक्ति विनय भाव, समर्पण भाव से भरा हुआ होता है।













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