दोहों का रहस्य समाचार

दोहों का रहस्य -60 जीवन में कोई भी स्थायी नहीं है : संसार कर्मों और समय के दो पाटों के बीच सबको पीसता रहता है


दोहे भारतीय साहित्य की एक महत्वपूर्ण विधा हैं, जो संक्षिप्त और सटीक रूप में गहरी बातें कहने के लिए प्रसिद्ध हैं। दोहे में केवल दो पंक्तियां होती हैं, लेकिन इन पंक्तियों में निहित अर्थ और संदेश अत्यंत गहरे होते हैं। एक दोहा छोटा सा होता है, लेकिन उसमें जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समाहित होती हैं। यह संक्षिप्तता के साथ गहरे विचारों को व्यक्त करने का एक अद्भुत तरीका है। दोहों का रहस्य कॉलम की 60वीं कड़ी में पढ़ें मंजू अजमेरा का लेख…


चाकी चलती देखी, कै दिया कबीरा रोई।

ढाई पाट भीतर आई, के साबुत बचा ना कोई।


कबीर दास जी ने इस दोहे में जीवन के अनिवार्य सत्य—मृत्यु, माया, और कर्म के प्रभाव को गहरे रूप में व्यक्त किया है। वे कहते हैं कि जब उन्होंने चक्की (चाकी) को चलते देखा, तो वे रो पड़े क्योंकि उन्होंने उसमें जीवन की नश्वरता को पहचान लिया। चक्की के दो पाटों के बीच जो भी आता है, वह पिस जाता है—ठीक वैसे ही, यह संसार कर्मों और समय के दो पाटों के बीच सबको पीसता रहता है। कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली हो, इस चक्र से बच नहीं सकता। समय और परिस्थितियाँ सभी को प्रभावित करती हैं।

जीवन में कोई भी स्थायी नहीं है; समय हर किसी को बदल देता है। जैसे चक्की में गेहूं के दाने पिसकर आटा बन जाते हैं, वैसे ही मनुष्य भी समय के प्रभाव में ढलता जाता है। अहंकार, धन और सत्ता क्षणिक हैं। वैसे ही, एक शक्तिशाली राजा भी समय के साथ बूढ़ा और असहाय हो जाता है। एक धनी व्यापारी भी मृत्यु के बाद अपनी संपत्ति छोड़कर चला जाता है। जीवन में सुख-दुख, हानि-लाभ, सफलता-असफलता का चक्र चलता रहता है।

जो व्यक्ति संयम और धैर्य रखता है, वही इस चक्की के बीच रहकर भी बच सकता है। जैसे चक्की में गेहूं पिसने से आटा बनता है, वैसे ही मनुष्य अपने कर्मों के अनुसार फल प्राप्त करता है। यदि व्यक्ति अच्छे कर्म करेगा, तो उसका जीवन आनंदमय होगा; यदि बुरे कर्म करेगा, तो दुख भोगना पड़ेगा। रावण और कंस ने बुरे कर्म किए, तो उन्हें अपने कर्मों का फल मिला। महात्मा गांधी और संत रविदास ने सत्य और अहिंसा का मार्ग अपनाया, तो वे अमर हो गए।

जो व्यक्ति भौतिक सुखों और अहंकार से ऊपर उठकर सच्चे ज्ञान की खोज करता है, वही इस चक्की से मुक्त हो सकता है। ध्यान, साधना और सत्कर्मों से आत्मा को इस संसार के चक्र से बचाया जा सकता है। जीवन में सुख-दुख आते-जाते रहेंगे, लेकिन जो व्यक्ति धैर्य, ज्ञान और सेवा के मार्ग पर चलेगा, वही इस संसार के प्रभाव से मुक्त हो सकता है।

इस दोहे का सबसे गहरा संदेश यह है कि यह संसार कर्म और समय की चक्की है, जो सबको पीसती है। कोई भी इससे बच नहीं सकता, लेकिन जो व्यक्ति सत्य, प्रेम, और सेवा के मार्ग पर चलता है, वही मोक्ष को प्राप्त कर सकता है।

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