समाचार

नर्मदा-कावेरी के संगम का अति प्राचीन दिगंबर जैन सिद्व क्षेत्र: यहां मिला था साढ़े तीन करोड़ मुनियों को मोक्ष


मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा और कावेरी नदियों के संगम पर यह अति प्राचीन दिगम्बर जैन सिद्व क्षेत्र सिद्ववरकूट स्थित है। जैन मतानुसार क्षेत्र से दो चक्रवर्ती, 10 कामदेव व साढे तीन करोड़ मुनि मोक्ष को गए थे। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की विशेष रिपोर्ट…


खंडवा। मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा और कावेरी नदियों के संगम पर यह अति प्राचीन दिगम्बर जैन सिद्व क्षेत्र सिद्ववरकूट स्थित है। जैन मतानुसार क्षेत्र से दो चक्रवर्ती, 10 कामदेव व साढे तीन करोड़ मुनि मोक्ष को गए थे। संवत 1535 में इंदौर में निवास करने वाले भट्टारक महेन्द्रकीर्ति को अतिप्राचीन क्षेत्र होने का स्वप्न आया। स्वप्न के अनुसार भट्टारक महेन्द्रकीर्ति जी ने वनों में इस क्षेत्र की खोज करना प्रारम्भ किया और लगभग 10 वर्ष की खोज करने के बाद संवत 1545 में भट्टारक महेन्द्रकीर्ति को नर्मदा नदी के तट पर जीर्णशीर्ण अवस्था में विशाल मंदिर जी के दर्शन हुए।

इस मंदिर में भगवान आदिनाथ व भगवान चन्द्रप्रभु की प्रतिमा के भी दर्शन हुए। संवत 1951 में मन्दिर जी का जीर्णोधार कराया गया तथा प्रतिमाओं की पंचकल्याण प्रतिष्ठा कराई। क्षेत्र पर मूलनायक प्रतिमा भगवान संभवनाथ जी की है। वर्तमान में क्षेत्र पर भगवान आदिनाथ, भगवान नेमीनाथ, भगवान पार्श्वनाथ, भगवान शांतिनाथ, भगवान महावीर, भगवान बाहुबली सहित कुल 13 मन्दिर हैं। क्षेत्र पर मानस्तम्भ व चरण छत्री भी है। क्षेत्र से कुछ ही दूरी पर एक कुण्ड है जिसे कष्ट निवारक कुण्ड कहा जाता है।

माना जाता है कि इस कुण्ड के जल से सभी रोग से मुक्ति हो जाती है। कुण्ड के पास ही एक अति प्राचीन पाण्डुक शिला भी है। क्षेत्र पर अन्य कई प्राचीन प्रतिमाएं भी स्थित हैं। कावेरी नदी के एक तट पर यह सिद्व क्षेत्र स्थित है तो दूसरी ओर नर्मदा के तट पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित है। क्षेत्र से ओंकारेश्वर आने जाने के लिए एक झूलापुल व नौका का भी उपयोग किया जाता है। क्षेत्र पर आवास व भोजनालय की व्यवस्था है।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
4
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page