सामाजिक सहयोग और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते हुए जौरा जैन समाज ने मंदिर में पीढ़ियों से सेवाभाव से जुड़ी एक सेवादार की बेटी का विवाह सामूहिक सहयोग से कराया। न केवल समस्त खर्च का वहन किया गया, बल्कि कन्या को उपहार एवं आवश्यक गृहस्थ सामग्री देकर सम्मानपूर्वक विदा किया गया। मुरैना से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर…
मुरैना। सामाजिक सहयोग और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते हुए जौरा जैन समाज ने मंदिर में पीढ़ियों से सेवाभाव से जुड़ी एक सेवादार की बेटी का विवाह सामूहिक सहयोग से कराया। न केवल समस्त खर्च का वहन किया गया, बल्कि कन्या को उपहार एवं आवश्यक गृहस्थ सामग्री देकर सम्मानपूर्वक विदा किया गया। जानकारी के अनुसार कुछ माह पूर्व मंदिर की सेवादार ने अपनी बिटिया के विवाह को लेकर आर्थिक चिंता मंदिर कमेटी के समक्ष व्यक्त की थी। उन्होंने बताया कि वह विवाह संबंधी खर्च वहन करने में असमर्थ हैं। इस पर मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सौभाग्यमल जैन और जैन मिलन सुपार्श्वनाथ के अध्यक्ष विकास जैन (लेक्चरर) ने उन्हें आश्वस्त किया कि जैन समाज सहयोग के माध्यम से संपूर्ण व्यवस्था करेगा। इसके बाद विकास जैन ने इस विषय को जैन समाज के व्हाट्सएप समूह में साझा किया और सहयोग की अपील की। अपील मिलते ही जैन मिलन सुपार्श्वनाथ, जैन मिलन महिला मंडल, मंदिर कमेटी जौरा तथा अखिल भारतीय दिगंबर जैन बरहिया महासभा मुरैना मंडल ने तत्काल बैठक आयोजित कीं और पूरे समाज को इस नेक कार्य से अवगत कराया। समाज के प्रबुद्ध बंधुओं ने करुणा, संवेदनशीलता और धर्मानुराग का परिचय देते हुए दान के रूप में हाथ आगे बढ़ाए। समाज ने लगभग एक लाख रुपये से अधिक की राशि भोजन, विवाह व्यवस्था और अन्य जरूरतों के लिए एकत्रित की। विवाह समारोह में करीब 500 लोगों को भोजन कराया गया।
दान-धर्म की परंपरा का जीवंत उदाहरण
कन्या को अलमारी, पलंग, बर्तन, कूलर, टीवी, साड़ियां, लहंगा, बैग, मेकअप किट, इंडक्शन, गैस चूल्हा, चांदी की तोड़िया-बिछिया और सोने की लोंग सहित गृहस्थी की संपूर्ण सामग्री भेंट की गई। इसके अलावा नेग-चालन के लिए लगभग 25 हजार रुपए नकद भी प्रदान किए गए। इस सहायता में न केवल आर्थिक योगदान शामिल था, बल्कि यह समाज की एकता, करुणा, सहानुभूति, दया और जैन आगम में बताए गए दान-धर्म की परंपरा का जीवंत उदाहरण भी बना।
सामाजिक एकता का उदाहरण
समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि यह पहल केवल एक विवाह का खर्च उठाना नहीं, बल्कि समाजिक एकजुटता, करुणा और परोपकार का संदेश देना है। जैन समाज ने साबित किया कि जब समाज साथ खड़ा होता है, तो कोई भी परिवार अकेला नहीं रहता। इस स्नेहपूर्ण और आदर्श सहयोग से हुआ यह विवाह आज जौरा जैन समाज की सामाजिक एकता का उज्ज्वल उदाहरण बन गया है।













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