देवास जिले का छोटा सा नगर हाटपिपलिया इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां दिगंबर जैन समाज की बहन-बेटियों ने एक अनूठा और प्रेरणादायक आयोजन कर समाज में नई ऊर्जा और संस्कारों का संचार किया। 11 एवं 12 जून को आयोजित दो दिवसीय ‘बहन-बेटी स्नेह मिलन समारोह’ ने न केवल नगर में बल्कि पूरे भारतवर्ष में अपनी एक विशिष्ट पहचान बना ली है। पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की रिपोर्ट…
हाटपिपलिया (देवास)। देवास जिले का छोटा सा नगर हाटपिपलिया इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां दिगंबर जैन समाज की बहन-बेटियों ने एक अनूठा और प्रेरणादायक आयोजन कर समाज में नई ऊर्जा और संस्कारों का संचार किया। 11 एवं 12 जून को आयोजित दो दिवसीय ‘बहन-बेटी स्नेह मिलन समारोह’ ने न केवल नगर में बल्कि पूरे भारतवर्ष में अपनी एक विशिष्ट पहचान बना ली है।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य जन्मभूमि के प्रति कृतज्ञता और माता-पिता के प्रति आदर प्रकट करना था। यह आयोजन नारी सशक्तिकरण, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों का जीवंत उदाहरण बन गया।
शोभायात्रा, खेल और आत्मिक जुड़ाव
कार्यक्रम की शुरुआत 11 जून को प्रातःकाल एक भव्य शोभायात्रा से हुई, जो गांधी चौक से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई पुनः वहीं सम्पन्न हुई। शोभायात्रा में बहन-बेटियों ने पारंपरिक वेशभूषा में, जैन धर्म की ध्वजा के साथ नृत्य-भक्ति करते हुए सहभागिता की।
नगरवासियों ने अपने घरों के बाहर स्वागत कर ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना को जीवंत कर दिया।
मध्यान में गांधी चौक स्थित अतिथि निवास में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। संध्या बेला में भक्तामर स्तोत्र एवं आरती के पश्चात एक परिचय सत्र आयोजित किया गया, जहां सभी बहन-बेटियों ने एक-दूसरे को जानने और जोड़ने का प्रयास किया।
भक्ति, विनय और भावभीनी विदाई
12 जून को सुबह आदिनाथ मंडल विधान का आयोजन किया गया, जिसमें चिद्रूप भैया ने विधिपूर्वक पूजन सम्पन्न कराया। इस विधान में भक्ति और उल्लास का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
दोपहर में विनय सम्पन्नता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बहन-बेटियों ने समाज के वरिष्ठ जनों को चांदी के प्रतीक सिक्के भेंट कर उनका सम्मान किया — यह जन्मभूमि और पूर्वजों के प्रति आदरभाव का प्रतीक था। इसके पश्चात सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया।
समारोह के अंतिम चरण में, रात्रि में समाज की ओर से सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें सभी प्रतिभागी बहन-बेटियों को सम्मानित कर भावभीनी विदाई दी गई।
200 बहन-बेटियों की सहभागिता ने रचा इतिहास
इस आयोजन में 21 वर्ष से 80 वर्ष तक की आयु की करीब 200 बहन-बेटियों ने सक्रिय भागीदारी की। यह आयोजन न केवल प्रथम बार हुआ, बल्कि इसकी सफलता ने यह सिद्ध कर दिया कि समाज में यदि स्नेह, आदर और उद्देश्य हो, तो आयोजन सीमाएं नहीं बल्कि संस्कारों की परंपरा बन जाते हैं।













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