आचार्य श्री विमर्श सागर जी सहारनपुर जैन बाग प्रांगण में नवनिर्मित वीरोदय तीर्थ मंडपम में उपस्थित धर्म सभा को संबोधित कर रहे हैं। उनके प्रवचन का लाभ उठाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन यहां आ रहे हैं। सराहनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर…
सहारनपुर। अपने ही विचारों की जीवन में जब तक शुद्धि नहीं होती तब तक वह मृततुल्य है। जिनेंद्र भगवान ने हम सबके लिए तीन प्रकार की शुद्धि बताई है। उनमें पहली है मन शुद्धि पश्चात् वचन शुद्धि और काया शुद्धि। आज हमें मन प्राप्त हुआ है। मन का कार्य है अच्छे-बुरे का निर्णय करना। याद रखें, यदि आप अपने ही अच्छे-बुरे विचारों का निर्णय करके बुरे विचारों का हटाकर अच्छे-शुभ विचारों का आदर नहीं करते हैं तो आप अपने मन का सदुपयोग नहीं कर पा रहे हैं। आपकी मन शुद्धि नहीं हैं। जहाँ मन शुद्धि नहीं हैं वहाँ शेष शुद्धि भी संभव नहीं है। यह मांगलिक वचन सहारनपुर जैन बाग प्रांगण में नवनिर्मित वीरोदय तीर्थ मंडपम में उपस्थित धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री विमर्श सागर जी ने दिए। जीवन है पानी की बूंदे महाकाव्य में एक और नवीन छंद जोड़ते हुए आचार्य गुरुवर ने कहा -भावों की नित शुद्धि हो, हे प्रभु! ऐसी बुद्धि हो 17 मन पावन जीवन पावन, कभी नहीं दुर्बुद्धि हो। सन्मार्ग चर्या, हो-हो, मेरा मन लहलाये रे, वीरोदय तीर्थ मंडपम् सहारनपुर जीवन है पानी की बूंद, कब मिट जाये रे।
आज के बच्चे ही कल का भविष्य हैं
आचार्यश्री ने कहा कि मनुष्य जीवन एक खाली घड़े की तरह है। अब आपका ही कर्तव्य-दायित्व है कि आप अपने जीवन रूपी घड़े को शुद्ध विचार रूपी शुद्ध जल से भरते हैं अथवा कीचड़ गंदे पानी रूपी अशुद्ध विचारों से भरते हैं? विचारों का बहुत बड़ा प्रभाव होता है। वह प्रभाव स्वयं के ऊपर भी होता है और आसपास के वातावरण पर भी होता है। विचारों से ही आपके व्यक्तित्व का निर्माण होता है। आज आपके विचारों में धन की बहुत महत्ता है, आप धन को तिजोरी में सुरक्षित रखते हैं लेकिन, मुझे बड़ा आश्चर्य होता है, आपकी नजरों में आज धन अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। आपकी संतान का आपको कोई महत्व नहीं हैं क्योंकि, आज आप अपनी संतान को संस्कार नहीं दे पा रहे हैं। याद रखो, संतान की सुरक्षा संस्कारों से है। एक दस के नोट को भी बड़ी सुरक्षा से रखते हो, किन्तु संतान की कोई सुरक्षा नहीं। विचार तो करना ही होगा, क्योंकि आज के बच्चे ही कल का भविष्य हैं।













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