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चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन : धर्मात्मा आगामी काल के लिए पुण्य का संचय कर रहा है- विभाश्री माताजी


गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में प्रातःकालीन प्रवचन के दौरान सर्वप्रथम तत्वार्थ सूत्र कक्षा में नरकों के दुखों की चर्चा करते हुए लेश्याओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण यह नहीं कि हम क्या सोच रहे हैं ,महत्वपूर्ण यह है कि हम कैसे सोच रहे हैं। इंसान की आवश्यकता है रोटी कपड़ा और मकान। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


रांची। गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में प्रातःकालीन प्रवचन के दौरान सर्वप्रथम तत्वार्थ सूत्र कक्षा में नरकों के दुखों की चर्चा करते हुए लेश्याओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण यह नहीं कि हम क्या सोच रहे हैं ,महत्वपूर्ण यह है कि हम कैसे सोच रहे हैं। इंसान की आवश्यकता है रोटी कपड़ा और मकान। चाहे सोने की थाली में भोजन कर लो या सोने की गिलास में पानी पी लो लेकिन भूख दाल -रोटी से ही बुझेगी और प्यास पानी से ही बुझेगी।

हम व्यक्ति के व्यापार से समझ सकते हैं कि इसके परिणामों की क्या दशा है, वह उसकी कषाय पर निर्भर करता है। जैसी हमारी सोच है, हमें वैसा ही दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि आचार्य भगवन कहते हैं व्यक्ति की आवश्यकता रोटी, कपड़ा और मकान की होती है और कोई व्यक्ति हिंसा करके, झूठ बोलकर अपने व्यापार को करता है और कोई व्यक्ति हिंसा से रहित व्यापार करके अपना जीवन यापन करता है। दुख के समय जो तीव्र पीड़ा होती है, वह आर्तध्यान कहलाता है।

यह चार प्रकार का होता है ईष्ट वियोग, अनिष्ट संयोग, पीड़ा चिंतन, निदान। जहां आत्मघात का परिणाम होता है, जहां ईष्ट वियोग के कारण अपने घात का परिणाम हो या पर घात या दूसरों को मारने का परिणाम हो, वह सब कृष्ण लेश्या के परिणाम हैं। हमारे परिवार का कोई सदस्य जो हमें सबसे प्रिय हो यदि उसका वियोग हो जाए, मृत्यु हो जाए, उसे ईष्ट वियोग कहते हैं। ईष्ट वियोग और अनिष्ट वियोग संयोग हमारे जीवन का हिस्सा है। सीता को राम ने निकाल दिया तो सीता भी आत्महत्या कर सकती थीं लेकिन सीता ने ऐसा कुछ भी नहीं किया बल्कि अपना जीवन धर्मपूर्वक यापन किया और लव कुश को जन्म देकर उन्हें अच्छे संस्कार दिए।

धर्मात्मा आगामी काल के लिए पुण्य का संचय कर रहा है और अधर्मात्मा आगामी काल के लिए पाप का संचय कर रहा है। जीवन में कभी ईष्ट का वियोग हो, अनिष्ट का संयोग हो तो उन्हें सच्चे देव की आराधना करनी चाहिए। इस दुनिया में वह इंसान ही सबसे मजबूत है, जिसके ख़्वाब भी टूटे, सपने भी टूटे, अपने भी रूठे हैं फिर भी वह कहे…सब ठीक है।

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