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आचार्य श्री विद्यासागरजी की प्रतिकृति हुई विराजमान: गुरु उपकार भवन में आचार्य श्री ज्ञानसागरजी एवं आचार्य श्री विद्यासागरजी के चरण स्थापित


अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर परिसर के गुरु उपकार भवन में आचार्य श्री ज्ञानसागरजी एवं आचार्य श्री विद्यासागरजीके चरण स्थापित कर उनकी मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिष्ठा मुनि श्री संभवसागरजी, मुनि श्री निस्सीम सागरजी, मुनि श्री संस्कार सागरजी के सानिध्य में की गई। इसके बाद दोनों चरणों का प्रथम अभिषेक शुद्ध वस्त्रों के साथ किया गया। विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर…


विदिशा। अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर परिसर के गुरु उपकार भवन में आचार्य श्री ज्ञानसागरजी एवं आचार्य श्री विद्यासागरजीके चरण स्थापित कर उनकी मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिष्ठा मुनि श्री संभवसागरजी, मुनि श्री निस्सीम सागरजी, मुनि श्री संस्कार सागरजी के सानिध्य में की गई। इसके बाद दोनों चरणों का प्रथम अभिषेक शुद्ध वस्त्रों के साथ किया गया। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि इस बीच आचार्य श्री विद्यासागरजी की प्रतिकृति का आगमन जयजयकार के साथ हुआ तथा गुरु उपकार भवन में सिंहासन पर प्रतिकृति विराजमान की गई। इस अवसर पर मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ने कहा कि नगर के प्रत्येक भक्त के हृदय में गुरुदेव विराजमान है और यहां पर जितने भी कार्यक्रम हुए हैं और चल रहे हैं। वह सभी अभूतपूर्व हुए तथा ऊंचाइयों को प्राप्त हो रहे हैं। यह सब गुरुदेव की वरदानी छांव का ही परिणाम है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने अपने सभी शिष्यों को ऐसी घुट्टी पिलाई है कि उसके पास आशीर्वाद की कोई कमी नहीं रहेगी। उन्होंने गुरुदेव के हायकू को सुनाते हुए कहा कि ‘गुरु अंक में पले बड़े हम, अंक भी वही देंगे’ अर्थात उनकी गोद में रहकर हमने जो शिक्षा प्राप्त की उसका परिणाम भी उनके ही द्वारा हम सभी मुनिराजों को प्राप्त हो रहा है।

मुनि श्री संभवसागरजी ने सुनाए अपने संस्मरण 

मुनि श्री ने 17 फरवरी 2024 को स्मरण करते हुए कहा कि आज के दिन पूरे देश की नजर चंद्रगिरी डोंगरगढ़ की ओर थी। भारत ही नहीं विश्व का प्रत्येक भक्त जाप, भक्तामर, शांतिविधान या णमोकार महामंत्र का पाठ कर रहा था कि आज कोई चमत्कार घटित हो जाए और पूज्य गुरुदेव उठकर बैठ जाएं लेकिन, कोई चमत्कार घटित न हो सका। सभी की आंख गीली थी। सभी के मुख से एक ही उच्चारण था। ‘सबकुछ दिया है तुमने हमको हम कुछ भी न दे पाए’ हमारे और गुरुदेव के बीच अभी भी पचास किमी का फासला था। प्रातःकाल से हम लोग संध्या काल तक चालीस किमी चले और मात्र 10 किमी की दूरी शेष रह गई थी लेकिन, आप लोग सभी पुण्यशाली हो कि हमारे बाजू में बैठे मुनिराज निस्सीम सागर जी पिछले एक हफ्ता से गुरुजी के पास सेवा में दिनरात तत्पर थे।

गुरुदेव की स्मृतियां उभर रही: मुनिश्री 

गुरुदेव की शेष स्मृति को आप लोग उनके ही मुख से कल सुनेंगे। मुनि श्री ने कहा कि विदिशा वालों को जो कुछ भी गुरुदेव ने दिया। वह ‘भूतो न भविष्यति’। गुरु के उपकार को कभी भुलाया नहीं जा सकता। अरिहंत विहार का यह विशाल परिसर हो या शीतलधाम का विशाल समवशरण, गुरुदेव की स्मृतियां स्मृति पटल पर एक के बाद एक उभरकर सामने आ रही है।

आचार्य श्री समयसागरजी 23 मुनि दीक्षा देंगे

प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया 18 फरवरी को शाम 6 बजे नगर से मुक्तागिरी सिद्धक्षेत्र के लिए 6 बस तथा कई चार पहिया वाहनों से भक्तगण रवाना होंगे। ‘मुक्तागिरी’ मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र की सीमा से लगा हुआ प्रकृति का अनुपम स्थान है। जहां से अनंतानंत मुनिराजों ने साधना की एवं मोक्ष को गए हैं। ऐसे स्थान पर पहली बार आचार्य श्री समयसागर महाराज 19 फरवरी को 23 जैनेश्वरी मुनि दीक्षा देंगे। जिसमें विदिशा नगर गौरव ऐलक कैवल्य सागर एवं ऐलक गरिष्ठ सागर महाराज, ऐलक गौरव सागर महाराज सहित अन्य मुनिसंघों के संघस्थ ऐलक एवं क्षुल्लक शामिल हैं तथा कई नए ब्रह्मचारी भी दीक्षित हो सकते हैं।

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