सुबह कोहरा और कड़कती ठंड भी तपस्वियों का उत्साह कम नहीं कर सकी। पीपली बाजार स्थित मंदिर में 133 तपस्वियों और उनके परिवारजनों का सुबह 6 बजे से ही आना प्रारंभ हो गया था। मालारोपण महोत्सव में पूरे देशभर से आए तपस्वियों का बहुमान किया गया। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…
इंदौर। सुबह कोहरा और कड़कती ठंड भी तपस्वियों का उत्साह कम नहीं कर सकी। पीपली बाजार स्थित मंदिर में 133 तपस्वियों और उनके परिवारजनों का सुबह 6 बजे से ही आना प्रारंभ हो गया था। मालारोपण महोत्सव में पूरे देशभर से आए तपस्वियों का बहुमान किया गया। सुबह से ही बैंडबाजे और ढोल के साथ बग्घियों पर वरघोड़ा निकला। सबसे ज्यादा महिलाओं की संख्या तपस्वियों के रूप में नजर आई। पुष्पवर्षा और महिला मंडलों के भजनों से रास्ते-चौराहे गूंज उठे। बच्चों और युवाओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला। जिन शासन के जयघोष के साथ हाथों में झंडा थामे बच्चे उत्साहित नजर आ रहे थे, वहीं युवा ट्रैफिक व्यवस्था भी संभाल रहे थे।
दलालबाग स्थित परिसर में 2 अक्टूबर से चल रहे 47 दिवसीय उपाधान तप का तीन दिवसीय मालारोपण महोत्सव बुधवार को पीपली बाजार उपाश्रय में पार्श्वनाथ पंचकल्याणक पूजन के साथ प्रारंभ हुआ। सुबह नवकारसी के बाद सुबह 9 बजे पीपली बाजार उपाश्रय से बैंडबाजे और ढोल-नगाड़े के साथ शोभायात्रा सहित वरघोड़ा प्रारंभ हुआ। बग्घियों पर तपस्वियों को मान-सम्मान के साथ बैठाया गया। तपस्वी भी अपने तप रूपी रतन की बारिश आम जनता पर कर रहे थे। जुलूस में देशभर से आए 133 तपस्वियों का वरघोड़ा पीपली बाजार से खजूरी बाजार, गोकुलदास चौक, टोरी कॉर्नर, बड़ा गणपति, गंगवाल, महावीरबाग होते हुए दलालबाग पहुंचा।
घर से सजाकर लाई गईं पूजा की थालियां
भारी तादाद में समाजजन और परिवारजन शोभायात्रा में शामिल हुए। महिला मंडलों ने वाद्य यंत्रों के साथ जहां भजनों की प्रस्तुति दी। वहीं घर से सजाकर लाई गई पूजा की थालियां भी जुलूस में नजर आईं। आचार्यश्री विश्वासरत्नसागर मसा, आचार्य श्री मुदितसागर मसा सहित साधु-साध्वी और बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। इस अवसर पर जैन समाज के गणमान्य नागरिक, मुनि संघ और धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधि के साथ पुण्यपाल सुराणा, कैलाश नाहर आदि उपस्थित रहे। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर तपस्वियों का स्वागत किया। आयोजन स्थल पर विशाल मंच सजाया गया है, जहां महाराजश्री दोपहर को धर्मसभा को सबोधित किया। धार्मिक अनुष्ठान, कलात्मक सजावट और भक्तिगीतों की प्रस्तुति के बीच शाम 7 बजे से तपस्वियों और लाभार्थियों का बहुमान किया गया।













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