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मोक्ष मार्ग पर चलने का रास्ता कठिन, लेकिन भक्ति से मिलती है सफलता: श्री आदिनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव पर पहली बार निकाली भव्य रथ यात्रा


नगर के कालानीनगर में श्री आदिनाथ चैत्यालय में भगवान आदिनाथ जन्म एवं तप कल्याणक धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर श्री आदिनाथ चैत्यालय से रथ यात्रा निकाली गई। इंदौर से पढ़िए प्रीतम लखवाल की यह खबर…


इंदौर। नगर के कालानीनगर में श्री आदिनाथ चैत्यालय में भगवान आदिनाथ जन्म एवं तप कल्याणक धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर श्री आदिनाथ चैत्यालय से प्रथम बार रथ यात्रा निकाली गई। रजत रथ पर भगवान आदिनाथ को विराजित कर भगवान के जयकारों के बीच भजन-कीर्तन करते हुए कालानीनगर के विभिन्न मार्गों से रथयात्रा गुजरी। रथयात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया।

रथयात्रा मार्ग पर रंगोली सजाई गई थी। इस अवसर पर मुनिश्री सिद्धांतसागर जी महाराज ससंघ और आर्यिका यशस्विनी माताजी ससंघ भी इस शोभायात्रा में पैदल भ्रमण करते हुए चल रहे थे। मुनिराजों का कालानीनगर के त्रिमूर्ति दिगंबर जैन मंदिर के यहां पाद प्रक्षालन किया गया। रथयात्रा का समापन कालानी नगर के श्री आदिनाथ चैत्यालय में हुआ। यहां बड़ी संख्या में मौजूद श्रावक-श्राविकाओं को मुनिश्री सुबुद्धसागर जी महाराज, मुनिश्री सिद्धांतसागर जी महाराज, आर्यिका यशस्विनी माताजी और आर्यिका ज्ञेयश्री माताजी ने संबोधित करते हुए आदिनाथ जन्म एवं तप कल्याण का महत्व बताया।

आर्यिका यशस्विनी माताजी ने कहा कि भगवान आदिनाथ का जीवन और उनके सिद्धांत जैन धर्म के लिए हमेशा पदप्रदर्शक रहे हैं और आगे भी रहेंगे। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं को संयम, सम्यक ज्ञान सहित तप आदि कर धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर मुनिराज श्री सुबुद्धसागर जी महाराज और सुविशुद्धसागर जी महाराज भी मौजूद रहे। मुनिराजों के प्रवचनों के उपरांत विनिश जैन परिवार की ओर से अभिषेक और शांतिधारा का पुर्ण्याजन किया गया। कार्यक्रम में सामाजिक संसद के अध्यक्ष विनय बाकलीवाल, नवीन गोधा, विपिन गंगवाल, कैलाश वेद, वीरेंद्र बड़जात्या, पवन पाटोदी सहित कई समाजजनों ने मुनिराजों को श्रीफल भेंट किया। संचालन उषा पाटनी ने किया।

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