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शिक्षण शिविर में मुक्ति के मार्ग का चिन्तन बताया: बच्चों को फल वितरण कर पुण्यार्जन किया


जैन मिलन स्वतंत्र डबरा की ओर से संयोजित शिक्षण शिविर जारी है। दूसरे दिन मुक्ति मार्ग के तत्वों पर चर्चा कर बच्चों को बोध दिया गया। शिविर के अंत में फल वितरण किया गया। डबरा से पढ़िए, यह खबर…


डबरा। जैन मिलन स्वतंत्र डबरा की ओर से संयोजित शिक्षण शिविर के दूसरे दिन शास्त्री अर्चित जैन अकलेरा (झालावाड़) ने बताया कि सम्यग्दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र ये तीनों मिलकर मुक्ति के मार्ग हैं। तत्वभूत पदार्थों के विषय में श्रद्धा करना सो सम्यक दर्शन है। पदार्थों का यथार्थ ज्ञान होना सो सम्यक ज्ञान है तथा आत्मा के स्वरूपकी प्राप्ति के लिए सम्यक प्रवृति करना सो सम्यक चारित्र है।

जीव, अजीव, आस्रव, बंध, संवर, निर्जरा और मोक्ष ये सात तत्व हैं। किसी किसी आचार्य के मत से पुण्य और पाप ये दो तत्व भी पृथक माने गये हैं। किन्तु यहां आस्रव में ही उन दोनों का समावेश कर दिया गया है। इन सातों तत्वों का विस्तार पूर्वक वर्णन आगे के अध्यायों में किया जायगा एवं बच्चों को बाल बोध एक पढाया गया। शिविर के बाद बच्चों को फल वितरण जैन मिलन स्वतंत्र डबरा के शाखा संयोजक वीर संजय जैन मगरोनी वालों के सौजन्य से किया गया। शिविर में बच्चे महिला एवं पुरुष सम्मिलित हुए।

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