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घटयात्रा ध्वजारोहण सकलीकरण से पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव शुरू : मुख्य पंडाल में श्री जी को विराजमान कर अभिषेक शांतिधारा की 


आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के सानिध्य में पांच दिवसीय पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव ब्रह्मचारी नमन भैया के निर्देशन में हो रहा है। प्रातः की बेला से ही भक्तों का मंदिर आना शुरू हो गया था। सर्वप्रथम देव आज्ञा के बाद आचार्य श्री से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव निर्विघ्न संपन्न हो, इसके लिए देव आज्ञा ली गई। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की खबर…


रामगंजमंडी। आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के सानिध्य में पांच दिवसीय पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव ब्रह्मचारी नमन भया के निर्देशन में हो रहा है। प्रातः की बेला से ही भक्तों का मंदिर आना शुरू हो गया था। सर्वप्रथम देव आज्ञा के बाद आचार्य श्री से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव निर्विघ्न संपन्न हो, इसके लिए देव आज्ञा ली गई। साथ ही नगर के प्रमुख मार्ग से होते हुए घटयात्रा भी निकली। घटयात्रा में भी अपार उत्साह देखने को मिल रहा था। इसके उपरांत मुख्य पंडाल में श्री जी को विराजमान कर अभिषेक शांतिधारा की गई। वेदी शुद्धि, मंडप शुद्धि आदि की क्रियाएं की गई।

आयोजन की शुरुआत में ध्वजारोहण किया गया। यह भगवान स्वरूप पदमकुमार नीरजकुमार देवरी खानपुर वाले परिवार की ओर से किया गया। मंदिर जी का वातावरण भक्ति से ओतप्रोत रहा। इसी क्रम में इंद्र प्रतिष्ठा सकलीकरण आदि की क्रियाएं की गई। साथ ही याग मंडल विधान किया गया। दोपहर की बेला में भगवान की माता की गोद भराई की गई एवं भगवान के गर्भ कल्याण की खुशियां मनाई गई। इस महोत्सव में भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य सुधा जयकुमार डूंगरवाल परिवार को प्राप्त हुआ है।

हमें तीनों लोकों को ज्ञात कराना है तो विशेष बनना पड़ता है। 

आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का महत्व समझाया। उन्होंने कहा हम अपने परमात्मा का गर्भकल्याणक मना रहे हैं। इसकी विशेषता है यह सामान्य नहीं है, इन क्षणों में तीनों लोक क्षण-क्षण के लिए सुकून प्राप्त करते हैं। ऐसे महान जीवों का हम गर्भ कल्याणक मनाते हैं। तीनों लोकों का ज्ञात कराना है तो विशेष बनना पड़ता है। आचार्य श्री ने कहा यदि हमें तीनों लोकों को ज्ञात कराना है तो विशेष बनना पड़ता है। हमे ही नहीं बनना पड़ता जन्मदाता को और गर्भधारण करने वाले को भी विशेष बनना पड़ता है।

गर्भ कल्याणक ही आज मदर्स डे है 

उन्होंने गर्भ कल्याणक के विषय में कहा कि आज मदर्स डे है क्योंकि, गर्भ कल्याणक ही मां दिवस है। तीर्थंकर को गर्भ में धारण करने की योग्यता चाहिए। यह सबके बस की बात नहीं होती जो तीर्थंकर भगवान की अनंत भक्ति करते हैं। ऐसे जीव तीर्थंकर भगवान को गर्भ में धारण कर पाते हैं। परमात्मा से गले मिलकर नहीं जोड़ा जाता, परमात्मा को अपनी आस्था को जोड़ा जाता है। इतनी गहराई से जुड़ जाता है कि मनुष्य बने तो तीर्थंकर बन जाए महापुरुष बन जाए और महिलाएं हैं तो तीर्थंकर की माता बन जाए ऐसे जुड़ना चाहिए। आचार्य श्री ने पंचकल्याणक महोत्सव के लिए कहा कि यह पंचकल्याणक के 5 दिन आपके लिए अनमोल हैं। यह क्षण अमूल्य है आपके लिए तीन लोकों की संपत्ति एक तरफ है यदि आपका भाव कल्याणक के प्रति है, तीर्थंकर भगवान के पांचों कल्याणक हमारे भावों में हमारी क्रियाओं में चलने-फिरने में मात्र उनके कल्याणक और कुछ भी नहीं चाहिए, फिर देखो आनंद।

झोली फैला रहे तो छोटी क्यों फैला रहे?

आचार्य श्री ने एक कथन के माध्यम से कहा कि यदि हम झोली फैला रहे हैं तो छोटी क्यों फैला रहे हैं ? इस विषय पर गुरुजी ने कहा कि इतनी बड़ी फैलाओं की देने वाला थक जाए, ऐसा मांगों की देने वाला सोच में पड़ जाए। लोग भगवान शांतिनाथ के समक्ष आकर कहते हैं कि मेरी दुकान नहीं चल रही, मेरी दुकान चल जाए। भगवान के समक्ष झोली इतनी बड़ी कर दो कि जैसे आप हो वैसा ही होना हमें जो आपके पास है वैसा का वैसा ही हमें चाहिए। उसमें सुई की नोक के बराबर भी नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं भगवान के सामने छोटा भिखारी बनकर नहीं जाता। मैं बड़ा भिखारी बनकर जाता हूं। भावना ही भा रहे हो तो ऐसी भाव की अदभुत हो। वह भावना अपनी आत्मा में ऐसी दस्तक दे दे ऐसा हस्ताक्षर दे दे कि आप भी तीर्थंकर हो, आप भी केवली हो। ऐसी भावना भाओ कमजोर भावना भाने से मतलब क्या है।यदि कमजोर भावना भाएंगे तो धराशाई हो जाएंगे। रामगंजमंडी के लोग कमजोर नहीं है। 5 दिनों में यही काम करना है कि अपनी भावनाओं को इतना ऊपर ले जाना है कि हमें अगर इच्छा हो तो भावना हो तो मोक्ष की हो तीर्थंकर पद की हो, मोक्ष की हो, अनंत चतुष्टय की हो।

आज जो मैं हूं आचार्य श्री विराग सागर जी की वजह से हूं 

आचार्य श्री के गुरु आचार्य श्री विराग सागर महाराज के आचार्य

पदारोहण दिवस पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज में जो कुछ भी हूं आचार्य श्री विराग सागर की वजह से हूं। अगर गुरुदेव नहीं होते तो मैं भी नहीं होता। मैं नहीं होता तो मेरे पास भी कुछ भी नहीं होता। सारी की सारी कृपा उनकी है और यह सारा आशीर्वाद उन्हीं का है। मनुष्य पर्याय को सार्थक करने के लिए आचार्यश्री विराग सागर जी ने मुझे वरदान दिया कि मुझे दिगंबर बनाया। उनके उपकारों को हम सिर्फ स्मरण कर सकते हैं। रविवार की बेला में जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। जन्म की खुशियां मनाई जाएगी। जन्म कल्याण की शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्ग से होते हुए कृषि उपज मंडी पहुंचेगी, जहां बनी पांडुक शिला पर श्रीजी का अभिषेक होगा।

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