आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के आशीर्वाद तथा मुक्तागिरी में विराजमान आचार्य श्री समयसागर महाराज के आशीर्वाद से छह दिवसीय पंचकल्याणक महामहोत्सव का शुभारंभ जैन महाविद्यालय परिसर में निर्मित भव्य अयोध्या नगरी में होने जा रहा है। विदिशा से पढ़िए, यह खबर…
विदिशा। आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के आशीर्वाद तथा मुक्तागिरी में विराजमान आचार्य श्री समयसागर महाराज के आशीर्वाद से छह दिवसीय पंचकल्याणक महामहोत्सव का शुभारंभ जैन महाविद्यालय परिसर में निर्मित भव्य अयोध्या नगरी में होने जा रहा है। आयोजन समिति के प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि लगभग 25 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल में विशेष डोम के रूप में अयोध्या नगरी का निर्माण किया गया है। जिसमें करीब पांच हजार श्रावक-श्राविकाओं के बैठने की विशेष व्यवस्था है। इसी के साथ तीन भोजनशाला बनाई गई है। जिसमें सभी को शुद्ध सात्विक भोजन कूपन के माध्यम से प्राप्त होगा। बाहर से आने वाले अतिथियों के लिए आवास व्यवस्था शीतल भवन माधवगंज एवं शीतलधाम विदिशा में उपलब्ध रहेगी।
माधवगंज से घटयात्रा निकाली
बुधवार को प्रातः 6:15 बजे श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, माधवगंज से घटयात्रा निकाली गई। यह यात्रा मुनि श्री संभवसागरजी महाराज, मुनि श्री निस्सीमसागरजी महाराज एवं मुनि श्री संस्कारसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य तथा प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी विनय भैया सम्राट एवं तरुण भैया (इंदौर) के निर्देशन में प्रारंभ हुई। यात्रा पुराने अस्पताल रोड से होते हुए जैन महाविद्यालय परिसर में निर्मित अयोध्या नगरी पहुंची। अयोध्या नगरी पहुंचने के बाद प्रातः 7:15 बजे ध्वजारोहण हुआ। इसके साथ ही मंडप शुद्धि, पांडाल उद्घाटन, वेदी शुद्धि तथा श्रीजी का अभिषेक हुआ।
कुंडलपुर के बड़े बाबा की जैसी प्राचीनता
विश्व में व्याप्त अशांति का वातावरण शीघ्र समाप्त हो और सभी जीव शांति का अनुभव कर सकें। इस मंगल भावना के साथ मुनि श्री संभवसागर महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा कराई गई। इसके बाद नित्य नियम पूजन एवं धर्मसभा हुई। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री संभवसागर महाराज ने कहा कि कुंडलपुर के बड़े बाबा की जैसी प्राचीनता है। वैसी ही प्राचीनता बर्रो वाले बाबा की भी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 में जब गुरुदेव गंजबासौदा से विदिशा आए थे। उसी समय बर्रो गांव से भी इस भव्य प्रतिमा को विदिशा लाया गया था। गुरुदेव ने प्रतिमा को देखकर कहा था कि यह कुंडलपुर के बड़े बाबा की प्रतिकृति प्रतीत होती है।
चारों ओर सुख-समृद्धि का वातावरण बनेगा
मुनि श्री ने कहा कि बलुआ पत्थर से निर्मित यह प्रतिमा अत्यंत आकर्षक है, जिसे देखने वाला देर तक निहारता रह जाता है। गुरुदेव के आशीर्वाद से सभी कार्य समय पर संपन्न हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंच कल्याणक स्थल पर अयोध्या नगरी की रचना होते ही भगवान माता मरुदेवी के गर्भ में विराजमान होंगे और इंद्रों के आसन कंपायमान हो उठेंगे। चारों ओर सुख-समृद्धि का वातावरण बनेगा और कुबेर द्वारा रत्नों की वर्षा का प्रतीकात्मक आयोजन होगा।
सही उत्तर देने वालों को पुरस्कार दिए
मुनि श्री श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि विदिशा में इतना बड़ा धार्मिक आयोजन हो रहा है, इसलिए सभी को किसी न किसी रूप में इसमें अवश्य भाग लेना चाहिए।
इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीमसागर जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं के ज्ञान की परीक्षा लेते हुए कई प्रश्न पूछे। सही उत्तर देने वालों को पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम में मुनि श्री संस्कारसागर महाराज भी उपस्थित रहे।













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