अपने रक्त से दूसरों को जीवन देने का धर्म ही पुनीत कार्य है। मानव सेवा के लिए समर्पित एक युवक यह कार्य 99 बार कर चुका है। जीवन में इससे बड़ा संतोष कोई दूसरा नहीं है। नईदिल्ली से पढ़िए, यह खबर…
नईदिल्ली। अपने रक्त से दूसरों को जीवन देने का धर्म ही पुनीत कार्य है। मानव सेवा के लिए समर्पित एक युवक यह कार्य 99 बार कर चुका है। जीवन में इससे बड़ा संतोष कोई दूसरा नहीं है। पुनीत जैन ने बताया कि BJS (भारतीय जैन संगठन) 1993 में स्थापित दुनिया के सबसे बड़े जैन पंजीकृत NGO में से एक है। रक्तदान व्हाट्सएप ग्रुप 2 साल से इसकी एक शाखा है। मैं इस समूह का प्रोजेक्ट हेड हूं और 99 बार रक्तदान कर चुका हूं (78 बार रक्त, 21 बार थैलेसीमिया और डेंगू के रोगियों के लिए एसडीपी प्लेटलेट्स दान)। 2014 से 2019 तक। मैं फोर्टिस गुरुग्राम ब्लड बैंक का स्वैच्छिक दाता रहा हूं।
मैं कई रक्त व्हाट्सएप ग्रुपों आरएकेटी मिशन, आरएसवाईएस से जुड़ा हुआ हूं। 2023 से 2025 तक मैं लगातार राजीव गांधी कैंसर और शोध संस्थान में एसडीपी दान कर रहा हूं। मैं लायंस ब्लड बैंक, फ्रीडम ब्लड बैंक और भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी आदि के साथ नियमित समन्वय में हूं। गुरु तेग बहादुर अस्पताल, बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज दिल्ली आदि ने इन-हाउस ब्लड कैंप का विकल्प दिया है। मेदांता अस्पताल, गंगाराम आदि में फुटफॉल का अनुपात अधिक है। पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित जितेंद्रसिंह शंटी ने मुझे दो बार सम्मानित किया है। पुनीत ने बताया कि मैंने रक्तदान के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया है और समाज कल्याण के लिए शादी भी नहीं की।
हमारा आदर्श वाक्य है जीतेजी रक्तदान मरणोप्रांत अंगदान। कई मीडिया चैनलों ने मेरे लिए एक मंच बनाया जैसे कि दिल्ली न्यूज़-7, महावीर मिशन और सभी ज़ोन टाइम्स आदि। मैंने रक्त की कमी से पीड़ित परिवारों के लिए मनोवैज्ञानिक राहत पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने बताया कि मैं WHO को एक संदेश देने के लिए सबसे बड़ा रक्तदान शिविर आयोजित करने की आकांक्षा रखता हूं।













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