सावन का महीना शंकर जी को और उनके भक्तों को भी अत्यंत प्रिय है। इसलिए श्रावण माह की अमावस्या को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार यह अमावस्या तिथि बहुत खास है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुम चंद जैन ने बताया कि इस बार अमावस्या 16 जुलाई रात्रि 10 बजकर 08 मिनिट से प्रारंभ होकर 17 जुलाई सोमवार रात्रि 12 बजकर 01 मिनिट तक रहेगी। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…
मुरैना। यूं तो हर माह के कृष्ण पक्ष में अमावस्या तिथि आती है परंतु श्रावण माह की अमावस्या का पूरी साल इंतजार रहता है क्योंकि सावन के महीने में चारों तरफ हरियाली ही हरियाली या पानी नजर आता है। यह महीना शंकर जी को और उनके भक्तों को भी अत्यंत प्रिय है। इसलिए श्रावण माह की अमावस्या को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार यह अमावस्या तिथि बहुत खास है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुम चंद जैन ने बताया कि इस बार अमावस्या 16 जुलाई रात्रि 10 बजकर 08 मिनिट से प्रारंभ होकर 17 जुलाई सोमवार रात्रि 12 बजकर 01 मिनिट तक रहेगी। 17 जुलाई को प्रातः 05:05 बजे सूर्य की कर्क संक्रांति होगी जो इसे और खास बना देगी। वैसे तो सूर्य हर माह एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण करता है, परंतु कर्क और मकर दो राशियों में सूर्य संक्रमण का विशेष महत्व बताया है। इसी दिन से 06 माह के लिए सूर्य दक्षिण दिशा की तरफ गति करते हुए 06 माह तक दक्षिणायन रहते हैं। इस बीच सूर्य कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु राशियों में संक्रमण करेंगे। इस समय विवाह, देव प्रतिष्ठा, नवीन ग्रह प्रवेश, मुंडन, उपनयन संस्कार आदि कार्य वर्जित कहे जाते हैं।
शिव की पूजा करें
ज्योतिषाचार्य जैन ने कहा कि सावन के दूसरे सोमवार को हरियाली अमावस्या होने की वजह से इस दिन सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है और सोमवती अमावस्या के दिन शिव पूजा से पितृ दोष, शनि दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। इसी दिन सूर्य कर्क संक्रांति होने से जनता के लिए सुखद है। सूर्य का गोचर कर्क राशि में होने से कर्क राशि में बुधादित्य नामक राजयोग भी बन रहा है। इस राजयोग के प्रभाव से सूर्य देव की कृपा बरसेगी। शास्त्रों में इस अमावस्या पर पूजा-पाठ, स्नान-दान करना उत्तम माना गया है। साथ ही पर्यावरण की दृष्टि से भी हरियाली अमावस्या का बहुत महत्व है। वहीं हरियाली अमावस्या पर कुछ विशेष वृक्षों की पूजा करने से ग्रह दोष भी दूर होकर सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
हरियाली अमावस्या पर राशि अनुसार करें पेड़ पौधों का रोपण और उनकी पूजा
ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुम चंद जैन ने बताया कि अपनी राशि के अनुसार पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे तो जैसे जैसे पेड़ बड़ा होगा, आप के जीवन की उन्नति होती जाएगी।
मेष राशि – आंवले का पौधा
वृषभ राशि – जामुन का पौधा
मिथुन राशि – चंपा का पौधा
कर्क राशि – पीपल का पौधा
सिंह राशि- बरगद या अशोक का पौधा
कन्या राशि – बेलपत्र का पौधा, जूही का पौधा
तुला राशि – अर्जुन या नागकेसर का पौधा
वृश्चिक राशि – नीम का पौधा
धनु राशि -कनेर का पौधा
मकर राशि – शमी का पौधा
कुंभ राशि – शमी,कदंब या आम का पौधा
मीन राशि – बेर का पौधा
खराब ग्रहों की शांति ग्रहों के अनुसार पेड़ लगाकर करें। ज्योतिषाचार्य जैन ने बताया कि हरियाली अमावस्या पर अगर आप की कुंडली में किसी ग्रह की खराब दशा चल रही है तो उस ग्रह को प्रसन्न करने के लिए ग्रहों के अनुसार पेड़ पौधों लगाए और उनकी पूजा करने से ग्रहों की पीड़ा शांत होती है।
सूर्य ग्रह की शांति के लिए बेल पत्र, सफेद आक या मदार का
चंद्र – ग्रह की शांति के लिए पलाश या खिरनी
मंगल – ग्रह के लिए खेर का पेड़
बुध – ग्रह की शांति के लिए अपामार्ग
गुरु – ग्रह की शांति के लिए केले, पीपल
शुक्र – ग्रह की शांति के लिए गूलर
शनि – ग्रह के लिए शमी का पौधा
राहू केतु – के लिए सफेद चंदन दूर्वा













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