धर्म नगरी में चातुर्मासरत युगल मुनिराजों के सानिध्य में प्रतिदिन ज्ञान अमृतमय वर्षा हो रही है। प्रतिदिन आचार्य शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज प्रवचन कर रहे हैं। इस प्रवचन माला में बताया कि निजात्म दर्शन के लिए दृष्टि को बनाया जाता है। जब विशुद्धि का अंतर की आत्मा में चेतन की शक्ति में आत्म साध होता है। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर…
सनावद। धर्म नगरी में चातुर्मासरत युगल मुनिराजों के सानिध्य में प्रतिदिन ज्ञान अमृतमय वर्षा हो रही है। प्रतिदिन आचार्य शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज प्रवचन कर रहे हैं। इस प्रवचन माला में बताया कि निजात्म दर्शन के लिए दृष्टि को बनाया जाता है। जब विशुद्धि का अंतर की आत्मा में चेतन की शक्ति में आत्म साध होता है। प्रादुर्भाव होता है तब जगत का हर द्रव्य हर आत्म द्रव्य हर जीव तत्व परमात्मा दिखाई देता है पर इनको देखकर भी ये परिणाम कर देना कि भूमि पर भूमि गोचर होने वाला मेरी आत्मा में दृष्टि गोचर होने वाला जीव भविष्य का भगवान है। भविष्य का भगवान देखोगे तो अहिंसा व्रत का पालन कर पाओगे। जीवों को जीव नही देखना है।
जीवों को भविष्य का भगवान देखना है और जो संतांे की दृष्टि से जीवों को भविष्य का भगवान देखता है वो ही अहिंसा का पालन कर पाता है। पुण्यात्मा वो लोग होते हैं जो भगवान को देखकर कर भगवान की आज्ञा से चलने को कहते हैं। धर्मायत्नों को सुधारने के लिए धर्मात्मा को धर्म से जोड़ने के लिए ज्ञान का बोध होता है। उसका कल्याण ही होगा।













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