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णमोकार महामंत्र गुणवाचक है इसका कोई देवता नहीं: मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने णमोकार महामंत्र की शक्तियों से कराया परिचय 


णमोकार महामंत्र के किसी भी पद का उच्चारण करो। वह मंत्र बनकर आपको सुरक्षा कबच प्रदान करता है। यह उद्गार मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ने णमोकार महामंत्र की विशेषता बताते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह हमारे जीवन की शुरुआत से लेकर जीवन के अंत तक हमारा संरक्षण करता है। भोपाल से पढ़िए, यह खबर…


भोपाल। णमोकार महामंत्र के किसी भी पद का उच्चारण करो। वह मंत्र बनकर आपको सुरक्षा कवच प्रदान करता है। यह उद्गार मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ने णमोकार महामंत्र की विशेषता बताते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह हमारे जीवन की शुरुआत से लेकर जीवन के अंत तक हमारा संरक्षण करता है। दुनिया में जितने भी मंत्र है। उसमें उनका कोई न कोई आराध्य देव है, लेकिन णमोकार महामंत्र ही एक ऐसा मंत्र है जिसका कोई देवता नहीं। इसके पांचों पद अरहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय एवं साधू हैं, जो व्यक्ति वाचक नहीं, गुणवाचक हैं। इसमें कोई बीजाक्षर नहीं है। यह अनादि सिद्धमंत्र है, इसे सिद्ध करने की भी आवश्यकता नहीं। मात्र आपको जपने की देरी है। यह शांति प्रदाता, पौष्टिक मंत्र है। इस मंत्र के जपने से किसी का अहित नहीं हो सकता। यह मंत्र कभी भी मारन उच्चाटन, विद्वेष में काम नहीं करता। हां यदि कोई आपके ऊपर मूठ या मारण विद्या का उपयोग करता है तो उससे आपका बचाव करता है।

मारक विद्या को भी बेअसर करने की क्षमता है णमोकार मंत्र में

उन्होंने एक सत्य घटना सुनाते हुए कहा कि एक बार कोई जैन पंडित रेल्वे में सफर कर रहे थे। उसी ट्रेन में मारक विद्या में सिद्ध बाबा भी सफर कर रहे थे। उन्होंने सभी यात्रियों को डराया तथा धमकाया। सभी उनके वश में आ गए लेकिन, जो जैन पंडित ने उनकी बात नहीं मानी। जिससे उन्होंने क्रोधित होकर उनपर मारक विद्या का उपयोग किया पंडित जी मन ही मन णमोकार महामंत्र का स्मरण कर रहे थे। उन पर उस मारक विद्या का कोई असर नहीं हुआ। हां, वह बाबा जरूर पसीना-पसीना हो गया। थोड़ी देर बाद वह उठा और वाशरुम गया, जब वह नहीं लौटा तो देखा वह बाथरूम में ही ढेर पड़ा था। कहते है कि मारक विद्या एक बार जब निकल जाती है तो वह यदि सामने वाले के प्राण न पाए तो जिसने उस विद्या का उपयोग किया है उसी के प्राण ले लेती है।

4 से 12 अक्टूबर तक श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान 

मुनि श्री ने णमोकार महामंत्र की सबसे बड़ी विशेषता बताते हुए कहा कि यह मंत्र को किसी भी समय किसी भी अवस्था में तथा किसी भी क्रम में जाप दे सकते है। कहीं भी पढ़ सकते हैं। यह आनपूर्वी नहीं है। इसको शब्द रूप में अर्थात अकेले अ.सि.आ.उ.सा. का उच्चारण करने से भी णमोकार महामंत्र का उच्चारण हो जाता है। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि आगामी 4 से 12 अक्टूबर तक संस्कृत भाषा में लिपिबद्ध श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की आराधना मुनि श्री के मुखारबिंद से प्राकृत भाषा में लिपिबद्ध बीजाक्षरों से युक्त मंत्रों के साथ प्रारंभ होगी। जिसकी संपूर्ण तैयारियां हो चुकी है। जिसमें संपूर्ण भारत के श्रावक श्रेष्ठी भाग लेंगे एवं इस चातुर्मास की यह वृहद आखरी पूजा होगी। विधानाचार्य बाल ब्र.अशोक भैयाजी एवं अभय भैयाजी रहेंगे।

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