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जो इतिहास में कभी नहीं हुआ उसका नाम है रत्नत्रय : विश्व के कोने-कोने में जाकर नृत्य, संवाद और संगीत से प्रभावना का संकल्प 


वॉइस ऑफ़ जिनशासन कहे जाने वाले इंदौर के युवा लेखक और वक्ता स्काय किंग आकाश जैन एवं आकाशवाणी उद्घोषक अनुराग जैन के हृदय भूमि में जिनशासन यानी शाश्वत श्रमण संस्कृति की प्रभावना के लिए एक ऐसा बीज प्रस्फुटित हुआ, जो रत्नत्रय रूपी विराट वृक्ष बनकर अब सारी दुनिया में जिनशासन के मौलिक सिद्धांत रूपी मधुर फलों और विश्व मैत्री रूप की छांव को बाँटने हेतु तैयार है। इंदौर से पढ़िए, हरिहरसिंह चौहान की यह खबर…


इंदौर। वॉइस ऑफ़ जिनशासन कहे जाने वाले इंदौर के युवा लेखक और वक्ता स्काय किंग आकाश जैन एवं आकाशवाणी उद्घोषक अनुराग जैन के हृदय भूमि में जिनशासन यानी शाश्वत श्रमण संस्कृति की प्रभावना के लिए एक ऐसा बीज प्रस्फुटित हुआ, जो रत्नत्रय रूपी विराट वृक्ष बनकर अब सारी दुनिया में जिनशासन के मौलिक सिद्धांत रूपी मधुर फलों और विश्व मैत्री रूप की छांव को बाँटने हेतु तैयार है। इस रत्नत्रय टीम के मैनेजर सीएस पलाश जैन ने बताया कि यह सिर्फ एक कार्यक्रम विशेष नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण विश्व के कोने-कोने में जाकर नृत्य, संवाद और संगीत के माध्यम से जैन धर्म की वैश्विक प्रभावना का एक मंच है। रत्नत्रय शो के स्काय किंग आकाश जैन इसे एक क्रांति कहते हैं। उनके लिए यह जिनशासन को राजनैतिक एवं सामाजिक मजबूती देने वाले भविष्य का केंद्र बिंदु है।

अनेक संवाद और संदेश रत्नत्रय टीम को प्राप्त हो चुके

पहला शो पूर्ण होते ही सारे भारत वर्ष से अभी तक अनेक संवाद और संदेश रत्नत्रय टीम को प्राप्त हो चुके हैं। हर कोई अपने शहर में इसे आयोजित कराने का सपना बुन रहा है। हमें इस बात की प्रसन्नता हैं कि देश के इतने बड़े-बड़े नामचीन कलाकार हमारे पार्श्वनाथ भगवान की चरण छांव में रहकर पल्लवित हुए हैं। आकाश जैन नसिया जी वाले पारसनाथ भगवान को अपना इष्टदेव मानते हैं और वे इस कार्यक्रम की सफलता का श्रेय भी प्रभु पार्श्वनाथ की अतुल्य छांव को ही देते हैं। एंकर अनुराग जैन इस शो के विशेष अतिथि हैं, जो नसिया वाले पारस बाबा के परम भक्तों में से एक हैं।

हमने भी डटे रहने की मुस्कुराहट के साथ उसे स्वीकार किया

रत्नत्रय का यह कार्यक्रम विगत 7 अक्टूबर को आरोन में जो हुआ था। उसे एक शब्द में सिर्फ नियति जनित चमत्कार कहा जा सकता है, एक तरफ़ गुरु समर्पण की मिसाल आरोन मध्यप्रदेश और दूसरी तरफ़ हिम्मत ना हारने की पर्याय रत्नत्रय टीम। लगातार बारिश, कार्यक्रम के रद्द हो जाने का डर, पर इसके ऊपर श्रोताओं ज़िद और कलाकारों का धैर्य। आचार्य भगवंत को समर्पित इस शाम ने परीक्षाओं के जिस गुलदस्ते से हमारा स्वागत किया। हमने भी डटे रहने की उसे मुस्कुराहट के साथ उसे स्वीकार किया। 8 बार बारिश आई और गई। दर्शक कुर्सियों की छत बना कर मंच के नीचे छिपकर पास के विद्यालय में रूककर, इंतज़ार करते रहे पर अपने गुरु को समर्पित इस महोत्सव को छोड़कर जाने को तैयार ना हुए।

आरोन में जो हुआ है वह किसी असंभव से कम नहीं

मुनिश्री दुर्लभसागर जी मुनिराज की साधनापूर्ण आशीष सन्निधि में आरोन ने जो पहले कभी ना हो सका, एक ऐसा खुदरंग इतिहास रचा है। इसे शब्दों में बयां कर पाना संभव नहीं, पर आरोन में जो हुआ है वह किसी असंभव से कम नहीं। आरोन समाज ने हमें हौसला दिया, इसके लिए हमारी पूरी टीम आप सभी के प्रेम का आभार व्यक्त करती है। कुछ ही समय में देश के महानगरों में रत्नत्रय का भव्य मंचन देखने को मिलेगा। आप इस महा महोत्सव की सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। रत्नत्रयः जिनशासन का सांस्कृतिक प्रतिबिंब है, जिसका मूल मंत्र है ‘वर्धातां जिनशासनं’। धर्म और समाज को दिशा दिखाने के लिए यहां कार्यक्रम मील का पत्थर साबित होगा।

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