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नंदीश्वर दीप मंडल में धर्म भक्ति का फैला प्रकाश: मुनिराजों ने करवाई सभी धार्मिक क्रियाएं 


धर्म नगरी में चातुर्मास के लिए विराजित मुनिराजों के सानिध्य में अष्टानिका पर्व की चतुर्दशी के अवसर पर नंदीश्वर द्वीप मंडल विधान रचाया गया। मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में सुबह श्रीजी का पंचामृत अभिषेक और शांति धारा की गई। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर…


सनावद। धर्म नगरी में चातुर्मास के लिए विराजित मुनिराजों के सानिध्य में अष्टानिका पर्व की चतुर्दशी के अवसर पर नंदीश्वर द्वीप मंडल विधान रचाया गया। मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में सुबह श्रीजी का पंचामृत अभिषेक और शांति धारा की गई। शांतिधारा करने का सौभाग्य राजेशकुमार जैन रेलवे परिवार को प्राप्त हुआ। देशना संत निलय में मुनिराज की मंगल देशना हुई। इसमें मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज ने कहा कि हर जीव अपने क्रम के छयोत्तम से द्रव्य की व्यवस्था करता है। जितना तुम्हारा छयोत्तम होगा।

उतनी ही आप को धन की प्राप्ति होगी। पुण्य का छयोत्तम नहीं होगा तो आप को धन की प्राप्ति नहीं होगी। जिनका मोह कर्म कम हो जाता है वो जिनवाणी का रसपान करने चला आता है। बिना यश कीर्ति के छयोत्तम के कोई किसी का नाम नहीं लेता। जितनी आप की योग्यता होगी उतना ही आप को पुण्य मिलेगा। मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी ने कहा कि जब तक तुम्हारी बाहर की आँखें खुली हैं। जब तक तुम्हारी अंदर की आँखें नहीं खुलने वाली। एक बार अंदर की आँखें खोल के देख लिया तो बाहर की आंखों से देखने की इच्छा ही खत्म हो जाएगी। जब तक अंदर की आँखें बंद है तब तक संसार की ठोकरें खाना पड़ेगी। यदि अपनी आत्मा को परमात्मा बनाना है तो योगेंद्रसागर गुरुदेव के सिद्धांतों को जीवन में बैठाना है और अपने जीवन रूपी बगिया में सजाना है। प्रभु की वाणी जब तुम्हारे जीवन में उतरेगी तो तुम्हारी आत्मा शुद्ध हो जाएगी।

52 जिनालयों में 52 अर्घ्य समर्पित किए

दोपहर में युगल मुनिराज के सानिध्य में पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में नंदीश्वर द्वीप मंडल विधान रचाया गया। जिसमें 52 जिनालयों में 52 अर्घ्य समर्पित किए गए। मुनिश्री साध्य सागर जी ने विधान की महिमा बताते हुए कहा कि नंदीश्वर द्वीप में 52 जिनालय (चैत्यालय) हैं, जिनमें से प्रत्येक में 108 रत्नमय प्रतिमाएं हैं। नंदीश्वर द्वीप में देवता इस विधान का पालन करने से भक्तों को आध्यात्मिक लाभ मिलता है और वे अपने जीवन में शांति और समृद्धि प्राप्त करते हैं। नंदीश्वर दीप में देवता भी पूजा-अर्चना के लिए जाते हैं और यह माना जाता है कि जो भक्त शुद्ध भावों से इस विधान को करते हैं, वे भी देवगति को प्राप्त होते हैं।

इस अवसर पर अंजू पाटनी, मंजुला भूच ,सुबोधबाई जैन, राजकुमारी बाई जैन, निधि झांझरी ज्योति बाला धनोते, पूर्णिमा जैन, प्रशांत जैन,रिंकेश जैन, अचिंत्य जैन, सुदेश जटाले, कमल केके, बसंत पंचोलिया, सुरेश मुंशी, पवन जैन, तपन जैन, आशीष झांझरी, जंगलेश जैन, गौतम जैन सहित समाजजन उपस्थित थे। शाम को मुनिराजों ने संत निलय में गुरुदेव के कर कमलों से चातुर्मास प्रतिष्ठापन दिग्बंधन पुष्पक्षेपण की क्रियाएं संपन्न की।

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