समाचार

कठिनतम उपवासधारी आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी का विहार: मई में आएंगे बद्रीनाथ अष्टापद धाम


आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी का विहार हो रहा है। वे मई में बद्रीनाथ अष्टपद धाम में आएंगे। कठिनतम उपवास करने वाले आचार्य हैदराबाद में चातुर्मास कर महाराष्ट्र,छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश नैनीताल होते हुए अष्टापद की ओर विहार कर रहे हैं। बद्रीनाथ से पढ़िए राजकुमार अजमेरा जैन की यह खबर…


बद्रीनाथ/कोडरमा। तपस्वी मौन पूर्वक सिंहनिष्कडित व्रत करने वाले विश्व के प्रथम जैन संत अंतर्मना प्रातः स्मरणीय परम पूज्य आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी 21 जुलाई 2021 से 28 जनवरी 2023 तक 496 दिनों का उपवास और 61 दिन आहार ग्रहण करने वाले प्रसन्न सागर जी ने सम्मेदशिखर जी के पर्वत पर तपस्या की। इसके बाद तीर्थराज सम्मेदशिखर जी से मंगल विहार कर 2 वर्षांे में 6000 किमी की पैदल यात्रा करते हुए कुंजवन महाराष्ट्र, श्रवणबेलगोला होते हुए हैदराबाद में चातुर्मास कर महाराष्ट्र,छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश नैनीताल होते हुए अष्टापद की ओर विहार हो रहा है।

गुरुदेव सत्संग चमोली होते हुए अभी आगे बढ़ रहे हैं और संभावित मई के प्रथम सप्ताह में बद्रीनाथ के दरवाजा जो 6 माह से बंद था। वह आचार्य श्री द्वारा खोला जाएगा। इस अवसर पर शिष्य उपाध्याय श्री पीयूष सागर जी ने कहा कि गुरुदेव श्री प्रसन्न सागर जी ससंघ का विहार बद्रीनाथ अष्टापद धाम की ओर हो रहा है। माना जाता है कि भारत में बद्रीनाथ यात्रा चंद सर्वश्रेष्ठ पहाड़ियों में से एक है। जहां कार, ट्रक आदि भी चढ़ने में दम भरने लगता है। जब की वो सब तेल (ईंधन) से चलते है, लेकिन गुरुदेव अपने दम पर चलते हैं। ऐसी विशाल ऊंची पहाड़ियों पर वे ससंघ रोज 20 से 25 किमी हंसते हुए पैदल यात्रा कर रहे है।

संघ और अपने भक्तों के साथ यात्रा को पूरा कर रहे हैं

यात्रा होती भी है तो सीधे रास्तों से पर अंतर्मना गुरुदेव कठिन रास्तों से, पगडंडियों से, पथरीली जमीन पर संकरे रास्तों से अपने संघ और अपने भक्तांे के साथ यात्रा को पूरा कर रहे हैं। पूरे संघ के साधु दिन में एक बार ही आहार ग्रहण करते है लेकिन गुरुदेव सिर्फ एक आहार एक उपवास कर रहे हैं (दो दिन में एक बार आहार) फिर भी इस ऊर्जा के साथ सारी पहाड़ियां, सारे पर्वत, सारी नदियों को पार करते हुए, हंसते हंसते पैदल चल रहे हैं। इन सब के बीच अगर अष्टमी या चतुर्दशी आ गई तो गुरुदेव के 2 उपवास भी हो रहे हैं। आचार्य गुरुदेव श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज जो आज इस धरती पर जैन धर्म के किसी साधु के बस का नहीं..इतने आश्चर्यों से भरे हुए सागर को नित-नित नमन वंदन करते है। ये हमारा सौभाग्य है कि हम इस जन्म में पैदा हुए और इनके दर्शन कर रहे है।

इन्होंने किया नमोस्तु 

इसलिए शुरू से कह रहे है। तपस्या के शिरोमणि अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज… यानी आज के इस युग के साधना के गोमटेश्वर हैं। इस अवसर पर मनोज जैन हैदराबाद, विवेक जैन गंगवाल, कोलकाता, मनीष जैन सेठी, सीमा जैन सेठी, राजकुमार जैन अजमेरा ने गुरुवर के चरणों में कोटि-कोटि नमोस्तु प्रेषित किया।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
1
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

You cannot copy content of this page