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जयपुर में जिनबिंब पंचकल्याणक महोत्सव 9 नवंबर से होगा : 500 प्रतिमाओं को देश के 32 जैन मंदिरों में विराजमान किया जाएगा


भारत देश के सबसे अमूल्य भगवान जयपुर के दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान होंगे। मुनिश्री आदित्य सागर जी ससंघ के सान्निध्य में यह आयोजन 9 नवंबर से होगा। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि देश में पहली बार 32 जिन मंदिरों की 500 जिन प्रतिमाओं की एक साथ होगी। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…


इंदौर। भारत देश के सबसे अमूल्य भगवान जयपुर के दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान होंगे। मुनिश्री आदित्य सागर जी ससंघ के सान्निध्य में यह आयोजन 9 नवंबर से होगा। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि देश में पहली बार 32 जिन मंदिरों की 500 जिन प्रतिमाओं की एक साथ होगी। प्राण प्रतिष्ठा एवं जिन बिम्ब पंचकल्याणक महोत्सव 9 से 15 नवंबर तक होगा। विशाल नेमिनाथ जिन बिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव होगा। 8 नवम्बर मुनि संसघ का पिच्छिका परिवर्तन होगा। भारत की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारत में पहली बार 500 से अधिक जिन प्रतिमाओं की एक साथ प्राण प्रतिष्ठा का यह शुभ अवसर है। यह दिव्य आयोजन आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी के शिष्य मुनिश्री आदित्य सागरजी महाराज, मुनिश्री अप्रमित सागर जी महाराज, मुनिश्री सहज सागर जी एवं क्षुल्लक श्रेयश सागरजी ससंघ के मंगलमय सानिध्य में 9 से 15 नवंबर तक होगा।

11 हजार वर्ग फीट में पंडाल का निर्माण 

दद्दू ने कहा कि यह ऐतिहासिक जिनबिंब पंचकल्याणक महोत्सव प्रबंधकारिणी समिति, श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर कीर्ति नगर द्वारा आयोजित किया जा रहा है। समिति के अध्यक्ष प्रेम कुमार जैन और महामंत्री जगदीश जैन ने बताया कि यह आयोजन टोंक रोड स्थित मुंशीमहल गार्डन में भव्य स्तर पर होगा। जहां लगभग 11 हजार वर्ग फीट का पंडाल का निर्माण झांसी उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध कारीगरों द्वारा किया जा रहा है। संपूर्ण पंडाल को नए पवित्र वस्त्रों और पारंपरिक सजावटों से सजाया जा रहा है। जिससे यह स्थल एक जीवंत तीर्थ के रूप में रूपांतरित हो जाएगा। पंचकल्याणक महोत्सव के संरक्षक शिरोमणि दीक्षांत हाड़ा ने बताया कि इस महोत्सव का प्रमुख आकर्षण होगा।

आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक एकता का पर्व 

देश की सबसे विशाल स्फटिक की भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा, स्वर्ण रजत एवं बहुमूल्य रत्नों से निर्मित जिन प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा होगी। मुनि आदित्य सागर महाराज ने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक एकता का विराट पर्व बनने जा रहा है, जो विश्व जैन समाज के लिए गौरव का विषय होगा। उन्होंने बताया कि देश के सबसे बहुमूल्य भगवान की प्रतिमा जयपुर के जैन मंदिरों में विराजमान होगी। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव से श्रद्धालुओं की धर्म के प्रति प्राथमिकता एवं प्रभावना बढ़ेगी। प्रचार मंत्री आशीष वेद ने बताया कि महोत्सव की शुरूआत 8 नवंबर को मुनिश्री की पवित्र पिच्छिका परिवर्तन समारोह से होगी। जिसमें देशभर से 2000 से अधिक श्रावक-श्राविकाएँ भाग लेंगी।

मुनि आदित्य सागर महाराज के आशीर्वचन होंगे

मुख्य समन्वयक प्रचार-प्रसार विनोद जैन कोटखावदा के मुताबिक 9 से 15 नवम्बर तक सात दिवसीय जिनबिंब पंचकल्याणक अनुष्ठान महा महोत्सव होगा। प्रत्येक दिन प्रातः 6 बजे से नित्य नियम पूजा, अभिषेक श्रीजी की शांतिधारा के साथ मुनि आदित्य सागर महाराज के मंगलमय देशना आशीर्वचन होंगे। संध्या काल में मुनिश्री की आरती, इंद्र सभा, तथा सांस्कृतिक एवं भक्ति संगीत कार्यक्रम किए जाएंगे, जिनमें श्रद्धालु समाज जन भक्तिपूर्वक भाग लेंगे।

प्रतिमाओं के लिए विदेशों से भी मंगवाया पत्थर 

इन प्रतिष्ठित 500 प्रतिमाओं को देश के 32 जैन मंदिरों में विराजमान किया जाएगा। स्फटिक का नन्दीश्वर द्वीप भारत में पहली बार जयपुर में विराजमान होगा। विश्व की सबसे बड़ी खडगासन प्रतिमा भगवान पार्श्वनाथ की जो स्फटिक मणि की बनेगी। जयपुर में विराजमान होगी। ये सारी प्रतिमाएं बनाने के लिए भारत के साथ अफगानिस्तान, ब्राजील आदि देशों से भी पत्थर मंगाया गया है। सारी प्रतिमाएं जयपुर में ही निर्मित की जा रही है। लगभग ढाई साल से इन मूर्तियों का निर्माण कार्य चल रहा है। कसौटी पत्थर की भी प्रतिमा बनाई जा रही है।

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