कोटा में एलआईसी बिल्डिंग से भव्य जुलूस शोभायात्रा के साथ अपार जन सैलाब के साथ गणिनी विभा श्री माता जी (13 पिच्छिका) ससंघ मंदिर परिसर पहुंचा। रास्ते में संगीत की सुमधुर ध्वनियों के साथ श्रद्धालुओं ने जमकर भक्ति नृत्य किया। जगह-जगह स्वागत द्वारा बनाए गए। जहां भक्तों ने गुरु मां का पाद प्रक्षालन कर मंगल आरती की। माताजी ने यहां धर्मसभा को संबोधित किया। कोटा से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की खबर…
कोटा। आरके पुरम स्थित 1008 श्री मुनिसुव्रतनाथ त्रिकाल चौबीसी जैन मंदिर में गणिनी श्री विभा श्री माताजी माता जी ने धर्म सभा में कहा कि जिस नगर के लोगों का महान सातिशय पुण्य का उदय होता है। उस नगर में संतों का आगमन होता है। जीवन में सब कुछ सुलभ है। संत समागम दुर्लभ है। संत जहां पर आते हैं वहां सोना सोना हो जाया करता है। संत जहां से जाते है। वहां सूना-सूना हो जाता है। मानव पर्याय महान दुर्लभ चिंतामणि रत्न के समान है।
उन्होंने कहा कि चौरासी लाख गतियां में भटकने के बाद इस दुर्लभ मानव पर्याय को प्राप्त करके सच्चे देव शास्त्र गुरु की सेवा भक्ति श्रद्धा समर्पण के साथ करना चाहिए। मानव पर्याय का एक क्षण भी व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। जीवन में देव शास्त्र गुरु की सेवा से आगे चलकर निग्रंथ और अरिहंत पद की प्राप्ति भी की जा सकती है। मंदिर समिति के अध्यक्ष अंकित जैन ने बताया कि एलआईसी बिल्डिंग से भव्य जुलूस शोभायात्रा के साथ अपार जन सैलाब के साथ गुरु मां विभा श्री माता जी (13 पिच्छिका) ससंघ मंदिर परिसर पहुंचा। रास्ते में संगीत की सुमधुर ध्वनियों के साथ श्रद्धालुओं ने जमकर भक्ति नृत्य किया। जगह-जगह स्वागत द्वारा बनाए गए। जहां भक्तों ने गुरु मां का पाद प्रक्षालन कर मंगल आरती की।
इन्होंने लिया धर्म लाभ और यह रहे उपस्थित
मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष ज्ञानचंद जैन और महामंत्री अनुज गोधा ने बताया कि धर्मसभा में मंगल दीप प्रज्वलन एवं शस्त्र भेंट करने का सौभाग्य ज्ञानचंद जैन, संजय जैन, तृप्ति जैन परिवार जन को प्राप्त हुआ। धर्मसभा के प्रारंभ में मंगलाचरण पाठ नन्हीं-नन्हीं बच्चियों ने भावपूर्ण मुद्रा में किया। धर्मसभा में सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष प्रकाश बज महामंत्री पदम बडला, कोषाध्यक्ष जितेंद्र हरसोरा, जेके जैन, लोकेश बरमूडा, पारस जैन, पंकज जैन, पदम जैन, अनिल ठोरा, चंद्रेश जैन, रितेश सेठी, लोकेश जैन, सीसवाली सहित सैकड़ों श्रावक श्रेष्ठी उपस्थित थे।
मंदिर समिति के कार्याध्यक्ष प्रकाश जैन ने बताया कि प्रातः काल अभिषेक के बाद विश्व शांति की मंगल कामना के साथ शांतिधारा की गई। गुरु मां विभा श्री माताजी ने अपनी मधुर आवाज में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा की आपके पास यदि साधन है तो उसका उपयोग धर्म कार्य में करना चाहिए। पाप कार्य में नहीं। जीवन में पल कल का कोई भरोसा नहीं। एक सांस के बाद तुम दूसरी सांस ले पाओगे। इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। जीवन सदैव सकारात्मक रहे गतिशील रहे।













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