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धर्मसभा में दिए प्रवचन : गृहस्थ भी चाहता है कि वह परम लक्ष्य तक पहुंचे और प्रभु को प्राप्त करें – मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज


मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने आज अपने प्रवचन में कहा कि प्रभु तक पहुंचने के दो मार्ग हैं -एक वह मार्ग है जहां संसार से होकर भगवान की ओर जाना होता है, किंतु उसकी लंबाई बहुत है। दूसरा मार्ग है जो गुरु के निर्देशन में प्रभु की ओर पहुंचाता है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


इंदौर। छत्रपति नगर के दलाल बाग में मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने आज अपने प्रवचन में कहा कि प्रभु तक पहुंचने के दो मार्ग हैं -एक वह मार्ग है जहां संसार से होकर भगवान की ओर जाना होता है, किंतु उसकी लंबाई बहुत है। दूसरा मार्ग है जो गुरु के निर्देशन में प्रभु की ओर पहुंचाता है। इस पृथ्वी पर गृहस्थों की संख्या बहुत बड़ी है। पूरे दिगंबर जैन शासन को दिशा निर्देश देने हेतु कुल 1800 साधु – साध्वियों ने कमान संभाल रखी है, इनमें से 18 का वैश्विक प्रभाव है। बाकी साधुओं ने भी जैन संप्रदाय को व्यवस्थित और सुचारू कर रखा है। ग्रहस्थ की हजार मजबूरी होती है ,उसको बहुत संक्लेश रहता है।

ग्रहस्थ भी चाहता है कि वह परम लक्ष्य तक पहुंचे, और प्रभु को प्राप्त करें। किंतु उसके जीवन में भटकाव बहुत है। आप पूछते हैं गृहस्थी में असंतुलन क्या है ? फिर बताते हैं, इंद्रिय ग्रहस्थो को धोखा देती है, बुढ़ापे में कुछ नहीं पचता। बुढ़ापा रुपी डायन जब आती है तो आदमी कांप जाता है। मृत्यु के संकेत सबको मिलते हैं। ग्रहस्थो के तीन सूत्र है- माना कि , चुकीं और इसलिए। आपका मन भ्रमित रहता है , जो यथार्थ है वो महसूस नहीं होता। आपने कहा कि पहली बार में इंसान में भगवान देख लेना बहुत मुश्किल है पर मैंने तो देखे हैं, वे थे आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज।

मैंने उनकी आज्ञा को भगवान की आज्ञा समझा। जीवन में गुरुदेव के ऊपर कषाय कभी पैदा नहीं हुई। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि आज प्रातः गुरुदेव के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन के बाद गुरुदेव की आठ द्रव्यों से सभी श्रावक- श्राविकाओं ने पूजन की। इस अवसर पर मनोज बाकलीवाल, मनीष नायक, सतीश डबडेरा, सचिन जैन, सतीश जैन, पीसी जैन,शिरीष अजमेरा, कमल अग्रवाल, अमित जैन, आलोक बंडा, आदि विशेष रूप से मौजूद थे।

पूज्य मुनि श्री निस्वार्थ सागर जी एवं क्षुल्लक श्री हीरक सागर जी महाराज भी मंच पर विराजित थे। प्रतिदिन प्रातः 6:00 बजे आचार्य भक्ति, फिर 7:00 बजे कलश के बाद 7:45 पर शांति धारा मंदिर जी में होती है तत्पश्चात 8.30 बजे से आचार्य श्री जी की पूजन, 9:00 बजे से प्रवचन, दलाल बाग में हों रहे हैं । तत्पश्चात आहार चर्या होती है।

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