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पांच विष विवाद, अज्ञान, ईर्ष्या, चिंता और कुटिलता : :मुनि श्री आदित्य सागर जी ने धर्मसभा में दिए प्रवचन


मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने बुधवार को दिगंबर जैन श्री आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में विराजित हैं। बुधवार को मुनि श्री ने धर्म सभा में प्रवचन दिए। इसमें उन्होंने अपने लोकप्रिय इग्नोराय नमः का जिक्र करते हुए विवाद से बचने के लिए प्रेरित किया। इंदौर से पढ़िए यह खबर…


इंदौर। मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने बुधवार को दिगंबर जैन श्री आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में विवाद विषय पर प्रवचन देते हुए कहा कि यह जीवन हमें उन्नति के लिए मिला है लेकिन, उसे हम अवनति में बहा रहे हैं। जीवन में बहुत सारी क्रियाएं ऐसी हैं, जो विष का काम करती हैं। विवाद, अज्ञान, ईर्ष्या, चिंता और कुटिलता यह जीवन के सबसे बड़े पांच विष हैं। विवाद विष की चर्चा करते हुए मुनिश्री ने कहा कि वर्तमान में धर्म समाज संस्कृति के क्षेत्र और घर परिवार में कई लोग छोटी-छोटी बातों पर विवाद कर अपनी एनर्जी खत्म करते रहते हैं।

इग्नोराय नमः बोल कर मौन धारण करें

विवाद से ही कषाय और बैर उत्पन्न होता है और हमारे जीवन की सुख-शांति भंग होती है। इसलिए विवाद की स्थिति होने पर विषमवाद ना करें। समझदार व्यक्ति विवाद का विष नहीं पीते समाधान ढूंढते हैं क्योंकि’ वह जानते हैं की विवाद करने और कराने से मिलता कुछ नहीं दुर्गति ही होती है। इसलिए जीवन में विवाद को कभी स्थान मत दो और विवाद की स्थिति होने पर इग्नोराय नमः बोल कर मौन धारण कर लेते हैं।

पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट किया

धर्म सभा का शुभारंभ पंडित रमेशचंद बांझलके मंगलाचरण से हुआ। पूर्व आरटीओ पीसी जैन परिवार ने मुनि श्री के पाद प्रक्षालन एवं लता हीरालाल शाह ने मुनि श्री को शास्त्र भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर कैलाश जैन नेताजी, वीरेंद्र देवरी, राजेश जैन दद्दू, डॉ. जैनेंद्र जैन, अरविंद सोधिया, राजेंद्र नायक, अखिलेश सोधिया आदि उपस्थित थे। धर्म सभा का संचालन जिनालय ट्रस्ट के अध्यक्ष भूपेंद्र जैन ने किया।

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