बड़वाह से सिद्धवरकूट विहार कर रहे अंतर्मुखी मुनि श्रीपूज्य सागरजी महाराज के रास्ते में श्रावकों द्वारा पाद प्रक्षालन किया गया, तो उसी थाली में मुनिश्री के चरण अंकित हो गए। सिद्धवरकूट विहार के दौरान बड़वाह के श्रावक ने अपने घर व प्रतिष्ठान पर पाद प्रक्षालन किया। पढ़िए सनावद की यह पूरी खबर…
बड़वाह। साधना, त्याग और तप की महिमा आज भी देखने को मिलती है। बड़वाह से सिद्धवरकूट विहार कर रहे अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागरजी महाराज के रास्ते में श्रावकों द्वारा पाद प्रक्षालन किया गया, तो उसी थाली में मुनिश्री के चरण अंकित हो गए। अंतर्मुखी मुनि श्रीपूज्य सागरजी महाराज के सिद्धवरकूट विहार के दौरान बड़वाह के श्रावक पूर्णिमा संजय जैन, मोहना वाले बड़वाह और ऋषभ जैन, ओंकारेश्वर रोड ने अपने घर व प्रतिष्ठान पर पाद प्रक्षालन किया। उसके बाद गंधोदक को थाली से निकाल दिया और विहार में वापस शामिल हो गए।
मुनिश्री के चरण चिन्ह थाली में अंकित थे
विहार के बाद श्रावक पूर्णिमा संजय जैन ने घर जाकर देखा तो मुनिश्री के चरण चिन्ह थाली में अंकित थे। उसी प्रकार जब श्रावक ऋषभ जैन ने भी अपनी प्रतिष्ठान में देखा तो उनके यहां भी थाली में चरण चिन्ह अंकित थे।
प्रत्येक अमावस्या को एक देव शक्ति आती हैं
मुनिश्री को ढाई वर्षों से प्रत्येक अमावस्या को अंतरंग में एक देव शक्ति आती हैं उस समय वह श्रावकों के प्रश्नों के उत्तर देते हैं। यह शक्ति 5 से 10 मिनिट के लिए ही आती है।













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