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आठ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल 18 मई से प्रारंभ होगा : श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन गांधियों के मंदिर में होगा आयोजन 


 श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन गांधियों के मंदिर में सकल दिगंबर जैन समाज सागवाड़ा के संयोजन मंे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान रविवार 18 मई से प्रारंभ होगा। प्रातः मंदिर में अर्घ्य समर्पित कर जिनाज्ञा, देवाज्ञा विधि पूर्ण की जाएगी। इसके बाद दिगंबर जैन बोर्डिंग से बैंडबाजों के साथ घटयात्रा शोभायात्रा निकाली जाएगी। नित्य पूजन, विधान आदि होंगे। सागवाड़ा से पढ़िए, यह खबर…


सागवाड़ा। नगर के श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन गांधियों के मंदिर में सकल दिगंबर जैन समाज सागवाड़ा के संयोजन में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान रविवार 18 मई से प्रारंभ होगा। समाज के ट्रस्टी अश्विन बोबडा ने बताया कि शशिकांत हुक्मीचंद बोबडा द्वारा प्रतिष्ठाचार्य पंडित विनोद पगारिया ‘विरल’ के तत्वावधान में 8 दिवसिय विधान रविवार को ध्वजारोहण के साथ प्रारंभ होगा। इस अवसर पर रविवार को प्रातः मंदिर में अर्घ्य समर्पित कर जिनाज्ञा, देवाज्ञा विधि पूर्ण की जाएगी। इसके बाद दिगंबर जैन बोर्डिंग से बैंडबाजों के साथ घटयात्रा शोभायात्रा निकाली जाएगी। जो मांडवी चौक, पारसनाथ चौक होते हुए गांधियों के मंदिर पहुंचेगी। जहां कलशधारी महिलाओं द्वारा विधान स्थल पर भूमि शुद्धि की जाएगी। साथ ही यजमान परिवार द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा। सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा, मंडप प्रतिष्ठा अखंड दीप प्रज्वलन, पंच मंगल कलश और धूप घट स्थापना विधि की जाएगी। इसके बाद जिनेंद्र भगवान और सिद्धचक्र यंत्र का अभिषेक और विश्व शांति कामनार्थ प्रतिष्ठाचार्य पगारिया के मंत्रोच्चारण के साथ शांतिधारा की जाएगी। नवदेवता पूजा के बाद रविवार को सिद्धचक्र विधान की प्रथम पूजा के तहत विधान मंडप पर अष्ट द्रव्य श्रीफल युक्त आठ अर्घ समर्पित किये जाएंगे। वही सांयकाल आरती उतारी जाएगी।

नित्य ही विधान और आराधना होगी 

विधान के तहत 19 से 24 मई तक प्रतिदिन प्रातः आदिनाथ भगवान और सिद्धचक्र यंत्र का महाभिषेक व शांतिधारा होगी उसके बाद नित्यमह पूजन तथा सिद्धचक्र विधान पूजा शांति जाप्य होंगे। विधान महोत्सव के अंतिम दिन रविवार 25 मई को प्रातः अभिषेक पूजा के बाद सर्व शांति महायज्ञ के तहत तीर्थंकर, कैवली तथा गणधर हवन कुंड में जैन आगम में वर्णित विविध मंत्रोच्चारण के साथ इंद्र इंद्राणी समूह द्वारा दंशाग धूप घी की आहूति के साथ श्रीफल की पूर्णाहूति की जाएगी। पुण्याहवाचन, आरती व विसर्जन विधि के साथ जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा को रजत गंधकुटी मे विराजित कर बैंडबाजों व पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ शोभायात्रा निकाली जाएगी। जो मांडवी चौक होते हुए पुनः मंदिर पहुंचेगी। जहां जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा स्थापना के साथ विधान होगा।

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