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गणिनी आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माता जी का हुआ विहार: मंदिरों के दर्शन कर दिए प्रवचन 


गणिनी आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माता जी का 24 अप्रैल को प्रातः पंचबालयति दिगंबर जिनालय विजयनगर से मंगल विहार हुआ। आपने समवशरण दिगंबर जैन मंदिर के लिए मंगल विहार के दौरान अपने एलआईजी मंदिर, जावरा वाला मंदिर , उदासीन आश्रम, इंद्र भवन, अनूप भवन तथा समवशरण मंदिर में स्थित नंदीश्वर जिनालय, सहस्त्रकूट प्रतिमाओं मानस्तंभ के दर्शन किए। उन्होंने प्रवचन भी दिए। इंदौर से पढ़िए यह खबर…


इंदौर। गणिनी आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माता जी का 24 अप्रैल को प्रातः पंचबालयति दिगंबर जिनालय विजयनगर से मंगल विहार हुआ। आपने समवशरण दिगंबर जैन मंदिर के लिए मंगल विहार के दौरान अपने एलआईजी मंदिर, जावरा वाला मंदिर , उदासीन आश्रम, इंद्र भवन, अनूप भवन तथा समवशरण मंदिर में स्थित नंदीश्वर जिनालय, सहस्त्रकूट प्रतिमाओं मानस्तंभ के दर्शन किए। आर्यिका माताजी को शास्त्र जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य चिन्मय,राजेश पंचोलिया को प्राप्त हुआ। आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माताजी ने अपने प्रवचन में बताया कि सभी को ब्रह्म मुहूर्त में उठना जागना चाहिए,क्योंकि, पापी का सोते रहना अच्छा है पुण्य आत्मा जीव ही जाग जाते हैं।

जिन्हें हमने गिनती सिखाई वह हमारी गलती बताते है

परिवारों में विसंगति टेंशन के बारे में माताजी ने कटाक्ष कर बोला कि 14 वर्ष की उम्र के बाद जवानी उर्ध्वगामी ऊर्जावान होती है। आज जिन बच्चों को हम बोलना सिखाते हैं। वह हमें चुप रखते हैं। जिन्हें हमने गिनती सिखाई वह हमारी गलती बताते हैं। जिनके जन्म के लिए हमने सजदे किए थे। प्रार्थना की थी वह आज सदमे देते हैं। जिन्हें कंधे पर लिटा कर सुलाते थे। वह आज हमें कंडों पर सुलाते हैं। अग्नि संस्कार करते हैं। जिनके लिए खून पसीना बहाया था। वह आज हमें पानी में बहाते हैं। इसलिए जन्म से मृत्यु तक की यात्रा में जीवन का मूल्यांकन करना जरूरी है कि हमारी आत्मा का उद्धार किससे कैसे होगा?

देव गुरु जिनवाणी की शरण उपकारी

देव गुरु जिनवाणी की शरण उपकारी है। आदि सृष्टि मंगलम के भक्त राजेश पंचोलिया अनुसार विहार के दौरान अनेक स्थानों पर पूज्य माताजी के चरण प्रक्षालन किए गए। शाम को श्री सृष्टिभूषण माताजी का श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन बीस पंथी मंदिर मल्हारगंज के दर्शन कर रात्रि विश्राम किया।

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