आखातीज के दूसरे दिन सुबह जैन समाज के सैकड़ों बच्चों ने देवाधिदेव 1008 श्री पारसनाथ भगवान का अभिषेक देखा एवं परम पूज्य मुनि श्री 108 निर्वेग सागर महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा के साथ रविवारीय पूजन किया। उन्होंने गौशाल में दान भी दिया। पढ़िए राज कुमार अजमेरा और नवीन जैन की विशेष रिपोर्ट…
झुमरीतिलैया। आखातीज के दूसरे दिन सुबह जैन समाज के सैकड़ों बच्चों ने देवाधिदेव 1008 श्री पारसनाथ भगवान का अभिषेक देखा एवं परम पूज्य मुनि श्री 108 निर्वेग सागर महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा के साथ रविवारीय पूजन किया। आचार्य विद्यासागर पाठशाला के बच्चे प्रत्येक रविवार को दोनों मंदिरों में प्रातः पूजन और संध्या में आरती और स्वाध्याय करते हैं। आज सभी बच्चे एवं जैन पाठशाला की जैन शिक्षिका गौशाला परिषद गए। जहां छोटी-बड़ी गाय गौशाला में दान हेतु चारा प्रदान किया गया। जैन सुशील-शशि छाबड़ा की सुपौत्री काशवी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में और जैन महिला समाज एवं पाठशाला के बच्चों की तरफ से गाय हेतु चारा, गुड़, भूसा, हरी सब्जियां आदि का दान किया गया। बच्चों को रविवारीय प्रभावना का वितरण जैन प्रदीप-मीरा छाबड़ा की सुपौत्री कियाना के जन्मदिन के उपलक्ष्य में दिया गया।
सभी जीवों की रक्षा करें
इस अवसर पर निर्वेग सागर महाराज ने सभी बच्चों को दान देने की भावना को समझाया। उन्होंने बच्चों को बताया कि गौ मां का दान सबसे बड़ा दान होता है। हम भी को गाय के साथ सभी जीवों की रक्षा करनी चाहि। जीव की रक्षा करने से अनंत पुण्य का फल मिलता है। मुनि श्री ने कहा कि जीव दया जैन धर्म का सार है। जीव दया से बड़ा कोई धर्म नहीं है। उन्होंने सभी बच्चों को बहुत-बहुत आशीर्वाद दिया और कहा कि धर्म की शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार भी बच्चों को देने चाहिए।













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