वीआईपी रोड स्थित दलाल बाग में उपधान तप का शुभारंभ आचार्यश्री विश्वरत्नसागर जी महाराज के सान्निध्य में हुआ। इसमें देश भर से आए 160 श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुईं। इसमें 120 महिलाएं और 40 पुरुषों ने उपधान तप के पहले चरण में चौमुखी भगवान की परिक्रमा की। गुरु के वंदन और पूजन के बाद तप की प्रक्रिया आरंभ की गई। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…साभार।
इंदौर। वीआईपी रोड स्थित दलाल बाग में उपधान तप का शुभारंभ आचार्यश्री विश्वरत्नसागर जी महाराज के सान्निध्य में हुआ। इसमें देश भर से आए 160 श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुईं। इसमें 120 महिलाएं और 40 पुरुषों ने उपधान तप के पहले चरण में चौमुखी भगवान की परिक्रमा की। गुरु के वंदन और पूजन के बाद तप की प्रक्रिया आरंभ की गई। इस अवसर पर आचार्यश्री विश्वरत्नसागर जी महाराज ने कहा कि तपस्या का तेज और उसकी आभा मनुष्य के व्यक्तित्व को निखारने में सहायक होती है। उपधान तप श्रावक के जीवन का उत्कर्ष और साधु जीवन के अभ्यास की ऐसी प्रक्रिया है, जो आत्म कल्याण के मार्ग पर ले जाती है। उन्होंने कहा कि आज के आपाधापी भरे जीवन में से कुछ समय निकालकर हम स्वयं को श्रेष्ठ विचारों और संयमी जीवन से अलंकृत करने के लिए उपधान तप का मार्ग अपना सकते हैं। आचार्यश्री ने यह विचार गुरुवार सुबह वीआईपी रोड स्थित दलाल बाग परिसर में आरंभ हुए उपधान तप के शुभ प्रसंग के अवसर पर व्यक्त किए।
45 दिनों की है तप साधना, साधु जैसा जीवन जिएंगे श्रावक
उपधान तप में सभी तपस्वी करीब 45 दिनों तक उपवास की ऐसी श्रृंखला के भागीदार बनेंगे। जिसमें एक या दो दिन छोड़कर भोजन करना होगा। सभी तपस्वी इस दौरान विशेष रूप से बनाई गई अस्थायी नगरी में ही रहते हुए साधु जीवन की दिनचर्या जिएंगे। आचार्यश्री मृदृरत्नसागर जी, साध्वी हेमेंद्र श्री जी, शहर में विराजित जैनाचार्यों एवं अन्य 15 साधु-साध्वी भगवंतों की निश्रा में तपस्या का शुभारंभ हुआ। तपस्वी भाई-बहनों की अगवानी चातुर्मास संयोजक पुण्यपाल सुराना, कैलाश नाहर, ललित सी जैन, मनीष सुराना, दिलसुखराज कटारिया, प्रीतेश ओस्तवाल, दिलीप मंडोवरा, दीपक सुराना ने की। उपधान तप का दूसरा चरण 4 अक्टूबर को शुरू होगा। इसमें देश के अन्य शहरों के श्रावक-श्राविकाएं आएंगे। आचार्यश्री विश्वरत्नसागर जी अपनी 16 दिवसीय मौन साधना 6 अक्टूबर से शुरू करेंगे। दीपावली के बाद एकम को बड़ी महा मांगलिक के आयोजन के साथ इस मौन साधना से बाहर आएंगे। 14 से 16 नवंबर तक मुनि प्रवर उदयरत्नसागर जी महाराज के गणिवर्य पदवी समारोह का तीन दिवसीय आयोजन भी होगा। उपधान तप का समापन 22 नवंबर को होगा।













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