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तन की शुद्धि जल से, चेतन की शुद्धि भावों से होती है: आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने जैन मिलन विहार में किया धर्मसभा को संबोधित 


मुज़फ़्फ़रनगर की पावन धर्मधरा पर 35 पिच्छीधारी संयमियों के साथ आचार्य श्री विमर्शसागर जी अपूर्व धर्म की प्रभावना कर रहे हैं। जैन मिलन विहार में उपस्थित विशाल धर्मसभा में आचार्यश्री ने कहा कि जिनेंद्र देव कहते हैं कि एक गृहस्थ श्रावक को प्रतिदिन स्नान करना चाहिए। मुजफ्फरनगर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर…


मुज़फ़्फ़रनगर (उप्र)। जीवन है पानी की बूंद महाकाव्य के मूल रचनाकार आचार्य श्री विमर्शसागर जी दिगंबर जैन परंपरा में सर्वश्रेष्ठ साधक एवं विशाल चतुर्विध संघ के अधिनायक संघ शिरोमणि अद्वितीय संत हैं। मुज़फ़्फ़रनगर की पावन धर्मधरा पर 35 पिच्छीधारी संयमियों के साथ आचार्य श्री विमर्शसागर जी अपूर्व धर्म की प्रभावना कर रहे हैं। जैन मिलन विहार में उपस्थित विशाल धर्मसभा में आचार्यश्री ने कहा कि जिनेंद्र देव कहते हैं कि एक गृहस्थ श्रावक को प्रतिदिन स्नान करना चाहिए। बंधुओ! आप जन्म से लेकर आज तक तन अर्थात् शरीर को स्नान कराते आए हैं। ध्यान रखो, जल से शरीर की शुद्धि हो सकती है किंतु यदि आपको अपने चेतन को शुद्ध करना है तो वह बाहरी जल से शुद्ध नहीं होगा, चेतन शुद्धि के लिए आपको शुभ-शुद्ध भावजल की आवश्यकता है। भाव शुद्धि के बिना तीन काल में भी आपके चेतन-आत्मा की शुद्धि नहीं हो सकती। बंधुओ शरीर तन को स्नान कराते हुए तो अनादि काल बिता दिया। अब एक बार अपने भावों को संभालकर भावशुद्धि द्वारा अपने चेतन आत्मा को स्नान करा लो, आपकी आत्मा भी परमात्मा हो जाएगी।

जल को छानकर ही उपयोग करना चाहिए

जल की महत्ता बताते हुए आचार्य श्री ने कहा जिनेंद्र भगवान ने पानी की एक बूंद में असंख्यात जीव बतलाए हैं, वर्तमान में वैज्ञानिक भी एक बूंद पानी में 36,450 जीव बताते हैं। बंधुओं! आप प्रतिदिन स्नान करते हैं, छने हुए जल से या बिना छने जल से। विचार करना, आपने अनछने जल से स्नान कर लिया। आपने अपने शरीर की शुद्धि की है या शरीर को अशुद्ध कर लिया। आपकी जेब में रूमाल हो या न हो लेकिन, पानी छानने का छन्ना अवश्य होना चाहिए। पानी छानने का छन्ना आपके अहिंसक होने का प्रतीक है। अहिंसा धर्म का पालक अवश्य ही पानी छानकर ही प्रयोग करेगा। आपके पास छन्ना है तो समझ लेना आपके पर चारों अनुयोगों के शास्त्र है, क्योंकि आपके पास अहिंसा धर्म का आचरण है।

इस तरह रहेगा विहार का मार्ग

3 दिसंबर की मध्याह्न बेला में आचार्य श्री विमर्श सागर जी ससंघ जैन मिलन विहार कॉलोनी से पद विहार करते हुए नंदगांव में पदार्पण करेंगे। 4 दिसंबर की प्रातः बेला में आचार्य संघ की आहार चर्या नंदगांव में ही होगी। 4 दिसंबर को मध्याह्न बेला में आचार्य श्री विमर्शसागर जी अतिशय क्षेत्र वहलना में पदार्पण करेंगे, जहां उन्हीं के सानिध्य में आचार्य विमर्श सागर प्रवचन सभागार का लोकार्पण किया जाएगा। शाम को आचार्य संघ पद‌विहार करते हुए ग्राम तावली पहुं‌चेंगे।

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