जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक महोत्सव को वागड़ क्षेत्र सहित पूरे बांसवाड़ा जिले में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। गुरुवार को विभिन्न नगरों और गांवों में भगवान आदिनाथ की भव्य शोभायात्राएं निकाली गई तथा मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए। पढ़िए सुरेश चंद्र गांधी की रिपोर्ट…
नौगामा/बांसवाड़ा। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक महोत्सव को वागड़ क्षेत्र सहित पूरे बांसवाड़ा जिले में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। गुरुवार को विभिन्न नगरों और गांवों में भगवान आदिनाथ की भव्य शोभायात्राएं निकाली गई तथा मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए। वागड़ क्षेत्र के अधिकांश गांवों में भगवान आदिनाथ की प्रतिमाएं विराजमान हैं, जहां भक्तगण जन्म कल्याणक महोत्सव को हर्षोल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाते हैं।
आदि पुरुष हैं भगवान ऋषभदेव
भगवान आदिनाथ को भगवान ऋषभदेव के नाम से भी जाना जाता है। वे जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर और संस्थापक माने जाते हैं। उनका जन्म अयोध्या में इक्ष्वाकु वंश के राजा नाभि और रानी मरुदेवी के घर हुआ था। भगवान ऋषभदेव ने मानव सभ्यता को नई दिशा दी और लोगों को कृषि, कला, शिल्प तथा लेखन (ब्राह्मी लिपि) का ज्ञान दिया। उन्होंने समाज को असि (युद्ध), मसि (लेखन), कृषि, विद्या, शिल्प और वाणिज्य जैसे कार्यों की शिक्षा दी, जिससे कर्मभूमि की शुरुआत हुई। उनका प्रतीक (लांछन) बैल अर्थात वृषभ है। उनकी पत्नियां सुनंदा और सुमंगला थीं तथा उनके 100 पुत्र थे, जिनमें सबसे बड़े भरत चक्रवर्ती थे, और दो पुत्रियां ब्राह्मी व सुंदरी थीं। प्रयाग में वटवृक्ष के नीचे उन्होंने दीक्षा ली और कठोर तपस्या के बाद केवलज्ञान प्राप्त किया। अंततः माघ कृष्ण चतुर्दशी को कैलाश पर्वत पर उन्हें निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त हुआ। कुछ हिंदू परंपराओं में उन्हें भगवान विष्णु का अवतार भी माना जाता है और उन्हें आदि पुरुष या संस्थापक के रूप में सम्मान दिया जाता है।
बड़ी संख्या में प्रतिमाएं
बांसवाड़ा जिले के वागड़ क्षेत्र में भगवान आदिनाथ की बड़ी संख्या में प्रतिमाएं स्थापित हैं और कई स्थानों पर वे मूलनायक के रूप में विराजमान हैं। वागड़ क्षेत्र में सबसे बड़ी मूलनायक प्रतिमा नौगामा में स्थित “वागड़ के बड़ेबाबा” की प्रतिमा मानी जाती है, जो लगभग 700 वर्ष पुरानी बताई जाती है। हालांकि वीरोदय तीर्थ पर इससे भी बड़ी प्रतिमा स्थापित की गई है, लेकिन उसकी प्रतिष्ठा अभी शेष है। इस कारण वर्तमान में नौगामा की प्रतिमा को ही सबसे बड़ी माना जाता है। वागड़ क्षेत्र के अनेक गांवों और कस्बों में भगवान आदिनाथ की पद्मासन मुद्रा में प्रतिमाएं विराजमान हैं। इनमें प्रमुख रूप से बडोदिया, आनंदपुरी, बांसवाड़ा का आजाद चौक, आदिनाथ कॉलोनी परतापुर, गनोडा, परतापुर, बेडवा के बावसी, गांगड़तलाई, नौगामा, घाटोल, खोड़न, कलिंजरा और भुंगड़ा सहित कई स्थान शामिल हैं। इन मंदिरों में श्रद्धालु नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते हैं और भगवान के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं।
विशेष पूजन कार्यक्रम
भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक के अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजन, अभिषेक, आरती और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही नगरों और गांवों में भव्य शोभायात्राएं निकालकर भक्तजन भगवान के जन्मोत्सव को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाएंगे। यह महोत्सव जैन समाज के लिए आस्था, परंपरा और संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है।













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