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संस्कार शिविर में मूल सिंद्धांतों को बताया प्रासंगिक: शिविर अवलोकन करने पहुंच रहे समाज श्रेष्ठीजन  


यंग जैन स्टडी ग्रुप की ओर से आयोजित 10 वें शिविर में बच्चों के साथ-साथ समाज जनों का भी उत्साह बना हुआ है। प्रातः पूजन और अभिषेक विधि विमल छाबड़ा एवं जयश्री टोंग्या करवा रही हैं। शिविर का अवलोकन करने विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। इंदौर से पढ़िए, मनीष अजमेरा की यह खबर…


इंदौर। जैन धर्म के मूल सिद्धांत अहिंसा, सत्य, अचौर्य, शील और अपरिग्रह के आधार पर जीवन शैली अपनाने का संदेश पूरे विश्व को देना है। आज सर्वत्र हिंसा, झूठ कुशील और परिग्रह के कारण पूरा विश्व दुःखी हैं। मानव त्रस्त है। ऐसे में जैन धर्म के 5 सिद्धांत पाप से बचाते हैं। ये सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं, जो मानव संस्कृति को बचा सकते हैं।

यह बात विद्वानों ने जैन संस्कार शिविर में 2 हजार 100 से अधिक बच्चों को शिक्षित करते हुए कही। शिविर प्रमुख प्रकाश छाबड़ा ने बताया कि यंग जैन स्टडी ग्रुप की ओर से आयोजित 10 वें शिविर में बच्चों के साथ-साथ समाज जनों का भी उत्साह बना हुआ है। प्रातः पूजन और अभिषेक विधि विमल छाबड़ा एवं जयश्री टोंग्या करवा रही हैं। शिविर का अवलोकन करने विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी प्रतिदिन पहुंच रहे हैं।

अजय जैन मिंटा एवं कैलाश वेद ने बताया कि दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के पदाधिकारी शुक्रवार को अवलोकन करने पहुंचे और शिविर को सराहा। डीके जैन, नेम लुहाड़िया, दिलीप डोसी, जेनेश झांझरी, पिंकेश टोंग्या आदि ने अवलोकन किया। प्रीतेश जैन और निलेश पाटोदी ने अतिथियों का स्वागत किया।

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