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दीक्षार्थी अवनीश भाई की अनुमोदना कर गोद भराई की रस्म की : दीक्षार्थी ने गणधर वलय विधान की पूजा की, 9 दिवसीय अखंड णमोकार मंत्र पाठ का हुआ समापन


धार्मिक णमोकार मंत्र के जाप से पाप नष्ट होते हैं, कर्मों का क्षय होता है तथा पुण्य की प्राप्ति होती है।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने यह मंगल देशना बुधवार को धर्मसभा में दिए। टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…


टोंक। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित अतिशय क्षेत्र टोंक में विराजित हैं। आचार्य श्री के सानिध्य में बुधवार को अनेक धार्मिक अनुष्ठान सुबह से लेकर रात्रि तक हुए। जिसमें सुबह दीक्षार्थी अवनीश भाई द्वारा श्रीजी का पंचामृत अभिषेक किया गया। आचार्य श्री के प्रवचन के बाद 9 दिवसीय अखंड णमोकार मंत्र पाठ का समापन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में हुआ। अचार्य संघ की आहारचार्य के बाद दीक्षार्थी अवनीश भाई द्वारा कर पात्र में भोजन ग्रहण किया गया। दोपहर में संघ सानिध्य में वृहद प्रतिक्रमण प्रत्ययाखान कर दीक्षार्थी द्वारा गणधर वलय विधान की पूजन की गई। शाम को संपूर्ण समाज द्वारा बिनौरी शोभायात्रा निकाली जाकर दीक्षा की अनुमोदना के लिए श्रीफल,सूखे मेवे आदि से गोद भरी गई।

आयु परिवर्तन का महत्व समझना जरूरी

प्रातः काल आचार्य श्री ने उपदेश में बताया कि जीवन परिवर्तनशील है। संसारी प्राणी जन्म लेता है, शरीर में आयु अनुसार बालपन, किशोर अवस्था ,युवक अवस्था प्रौढ़ और बुढ़ापा क्रम से आता है। इसलिए जीवन में आयु परिवर्तन का महत्व समझना जरूरी है कि हर पल हर क्षण हमारी आयु कम हो रही है। कल भव्य प्राणी दीक्षा ले रहे हैं। दीक्षा व्यक्ति तभी लेता है जब वह संसार के दुखों से थक जाता है। संसार उसे कष्टमय लगता है। संसार के डॉक्टर जवाब दे देते हैं, तब व्यक्ति अपनी जिन धर्म पर आस्था के कारण सबसे बड़े गुरु आचार्य परमेष्ठी के पास आता है और निवेदन करता है कि आप मुझे दीक्षा देकर जन्म मरण के रोग से छुटकारा दिला दो। मैं दीक्षा लेना चाहता हूं। दीक्षा जीवन में आमूल चूल परिवर्तन है, दीक्षा लेने से ड्रेस, एड्रेस और लंच बदल जाता है। यह मंगल देश नाम आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने प्रथम आचार्य शांति सागर जी प्रवचन माला के अंतर्गत धर्म सभा में प्रकट की।

संयम दीक्षा रूपी बांध से पुण्य रूपी ऊर्जा की प्राप्ति

श्री ने आगे बताया कि अतिशय क्षेत्र टोंक नगर में 9 दिन अखंड श्री णमोकार मंत्र का पाठ संपूर्ण समाज ने आचार्य संघ सानिध्य में किया है। इससे पाप कर्म से आप बचते हैं ,कर्मों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज ने भी अपने जीवन में 18 करोड़ से अधिक मंत्रों का जाप किया। मंत्र जाप से मानसिक और शारीरिक कष्ट दूर होता है। जिस प्रकार पानी को रोक कर बांध बनाया जाता है। उसे ऊर्जा प्राप्त होती है। उसी प्रकार इस जीवन में संयम दीक्षा रूपी बांध से हमें पुण्य रूपी ऊर्जा की प्राप्ति होती है। बांध बनने से नदी का जलस्तर ऊंचा हो जाता है। उसी प्रकार संयम धारण करने से हमारे जीवन में भी उन्नति प्राप्त होती है जिस प्रकार आप पानी को नीचे से ऊपर विद्युत पंप से चढ़ाते हैं। उसी प्रकार जीवन में संयम रत्नत्रय धर्म रूपी विद्युत पंप से जीवन उन्नति को प्राप्त होता है। व्रत नियम से जीवन में उन्नति होती है।

आचार्य श्री का आशीर्वाद लिया

समाज प्रवक्ता पवन कंटान व विकास जागीरदार ने बताया कि इस अवसर पर मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने उपदेश मैं बताया कि 84 लाख मित्रों का राजा णमोकार मंत्र है। भावपूर्वक स्मरण सुनने करने से कुत्ता, बैल और अंजन चोर देवगती को प्राप्त हुए। बुधवार की धर्मसभा में प्रसिद्ध भामाशाह आरके मार्बल ग्रुप किशनगढ़ की 6 व्रत प्रतिमाधारी सुशीला अशोक पाटनी ने आचार्य श्री के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रीजी एवं आचार्य शांति सागर जी के एवं पूर्वाचार्यों के चित्र के समक्ष दीप प्रवज्जलन कर आचार्य श्री को जिनवाणी भेंटकर पूजन करने का सौभाग्य नमीष जैन अध्यक्ष पोरवाड़ समाज इंदौर, निर्मल छाबड़ा रायपुर, राजेश पंचोलिया इंदौर पवन धनोते सनावद को प्राप्त हुआ।

दीक्षार्थी का केशलोच 2 अक्टूबर को

2 अक्टूबर को प्रातः दीक्षार्थी के 5 बजे केशलोच पश्चात मंगल स्नान होगा। श्री जी का अभिषेक करेंगे। संघ के आहार के बाद प्राप्त 10:00 बजे दीक्षा संस्कार किया जाकर दीक्षार्थी का नया नाम करण किया जाएगा।सौभाग्य की बात है कि संघ के मुनि श्री हितेंद्र सागर जी , आर्यिका श्री निर्मोह मति, श्री पद्मयश मति ,श्री दिव्ययश मती का भी विजयदशमी को दीक्षा दिवस है।

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