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मुनिराजों का चंद्रोदय तीर्थ चांदखेड़ी में हुआ मंगल प्रवेश : मुनि श्री ने कहा कि क्षेत्र ने मुनि श्री सुधासागर महाराज के आने से क्षेत्र ने दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि की 


आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से दीक्षित शिष्य एवं मुनि श्री समय सागर महाराज के आज्ञानुव्रती शिष्य पूज्य मुनि श्री निष्पक्ष सागर महाराज एवं मुनिश्री निष्प्रह सागर महाराज का मंगल आगमन हुआ। चांदखेड़ी से अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…


चांदखेड़ी। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से दीक्षित शिष्य एवं मुनि श्री समय सागर महाराज के आज्ञानुव्रती शिष्य पूज्य मुनि श्री निष्पक्ष सागर महाराज एवं मुनिश्री निष्प्रह सागर महाराज का मंगल आगमन हुआ। गुरुदेव रामगंज मंडी नगर से मंगल विहार करते हुए झालावाड़ झालरापाटन होते हुए चंद्रोदय तीर्थ चांदखेड़ी मंगल प्रवेश किया। महाराज श्री का कस्बे की सीमा पर स्थित दहीखेड़ा चौराहे पर मंगल प्रवेश हुआ। जहां पर महिला महासमिति की अध्यक्षा निशा जैन व समिति की सदस्याओं सहित मंगल अगवानी की गई। महाराज श्री के चंद्रोदय तीर्थ क्षेत्र कमेटी की ओर से प्रशांत जैन ने बताया कि क्षेत्र कमेटी व समाज गुरुदेव के आगमन से अत्यंत उत्साहित थी और उमंग उल्लास से भरपूर थी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र पर मंगल आगमन अटरू रोड से मंदिर के उत्तरी दरवाजे से हुआ जहां पर मुनि द्वय के सानिध्य में भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव संपन्न होगा। यह क्षेत्र के लिए बहुत बड़ा अवसर था जब क्षेत्र पर गुरुदेव का आगमन हुआ एवं मुनि श्री के सानिध्य में ही भगवान आदिनाथ का अभिषेक एवं शांति धारा संपन्न हुई। क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष हुकम जैन काका, उपाध्यक्ष महेंद्र कांसल,सह कोषाध्यक्ष कैलाश पापड़ीवाल, मैला संयोजक मुकेश मासुम, आहार विहार संयोजक महावीर कालू, अनिल जैन, नीतेश जैन, सुरेंद्र सोनी, ओम जैन लीमी ने क्षेत्र के प्रवेश द्वार पर महाराज श्री की मंगल अगवानी पद प्रक्षालन मंगल आरती की । इस अवसर पर मंच संचालन क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष श्री हुकम जैन काका ने किया पूज्य मुनि श्री निष्पक्ष सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि इस क्षेत्र ने मुनिश्री सुधासागर जी के आगमन के बाद उनकी प्रेरणा से दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि की है। उन्होंने कहा जैसे ही मैं परिसर में प्रवेश कर रहा था वैसे ही सामने सिंह द्वार देखा वैसे ही दिव्य अनुभूतियां होने लगी। उन्होंने क्षेत्र कमेटी के द्वारा चलाए जा रहे विद्यालय की भी तारीफ की और कहा कि जैसे ही मैं सिंह द्वार से थोड़ा आगे बढ़ा और देखा कि क्षेत्र कमेटी द्वारा विद्यालय भी चलाया जा रहा है जो बहुत ही प्रशंसनीय है। कुरुक्षेत्र पर आचार्य श्री की गौरव गाथा को बताता हुआ संयम कीर्ति स्तंभ की बहुत ही अलौकिक है।

 जब आदिनाथ भगवान के दर्शन हुए तो अलग ही अनुभूति हुई

महाराज श्री ने कहा कि जैसे ही हम बढ़ते बढ़ते प्रभु आदिनाथ के समक्ष पहुंचे और जैसे ही प्रभु आदिनाथ के दर्शन किए एक अलग ही अनुभूति हुई। उन्होंने कहा क्षेत्र के निकट जब हम भवानी मंडी जो यहां से 85 किलोमीटर दूर है हम तभी से भावना भाते थे कि हम इतने नजदीक आए और बाबा के दर्शन जरूर करें। उन्होंने कहा जैसे ही क्षेत्र कमेटी ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज को आशीर्वाद लेते हुए क्षेत्र को उनके समर्पित किया उसके बाद जेसे ही समाज ने कमेटी ने अपने आप को गुरु चरणों में समर्पित किया यह क्षेत्र आज अपने आप फलीभूत होता दिख रहा है और यह क्षेत्र आने वाले दिनों में वृद्धिगत होगा और आने वाले दिनों में त्यागी वृद्धि साधु संत इस क्षेत्र पर आकर आत्मसाधना के मार्ग को और प्रशस्त करेंगे।

यह तीर्थ हमारी आन बान शान हुआ करते हैं 

महाराज श्री ने कहा कि यह तीर्थ हमारे जैन धर्म की आन बान शान हुआ करते हैं, इस तीर्थ के माध्यम से ही धर्म कर पाते हैं और परमात्मा के समीप आ पाते है, उन्होंने कहा कि जिन जिन ने अपने आप को गुरु चरणों में समर्पित किया और जिन तीर्थ कमेटी ने गुरु चरणों में अपने आप को समर्पित किया वह तीर्थ आज तीर्थराज बनकर पल्लवित हो रहे हैं।आप भी निष्प्रह भावना से भगवान की सेवा पूजा करो।

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