तारगा तीर्थ पर आचार्य श्री आर्जवसागरजी महाराज, आर्यिका पवित्रमति माताजी एवं आर्यिका सुदृढ़मति माताजी का समागम विनय संपन्नता का जीवंत उदाहरण बना। साढ़े करोड़ मुनियों की निर्वाण भूमि है तारगा। जिसकी वंदना कर त्यागी, तपस्वी, संत और नर-नारी हर कोई अपने को पुण्यशाली एवं सौभाग्यशाली मानता है। तारगा से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…
तारगा। तारगा तीर्थ पर आचार्य श्री आर्जवसागरजी महाराज, आर्यिका पवित्रमति माताजी एवं आर्यिका सुदृढ़मति माताजी का समागम विनय संपन्नता का जीवंत उदाहरण बना। साढ़े करोड़ मुनियों की निर्वाण भूमि है तारगा। जिसकी वंदना कर त्यागी, तपस्वी, संत और नर-नारी हर कोई अपने को पुण्यशाली एवं सौभाग्यशाली मानता है। वही क्षण देखने को मिला, जब तीर्थ की वंदना के लिए आर्यिका विज्ञानमति माताजी संघस्थ आर्यिका पवित्रमति माताजी एवं आचार्य श्री सुनील सागर महाराज से दीक्षित आर्यिका सुदृढ़मति माताजी संघ सहित पधारीं। उन्होंने तीर्थ वंदना की। तीर्थ वंदना के बाद दोनों माताजी संघ ने क्षेत्र में पूर्व में विराजित आचार्य श्री आर्जव सागरजी महाराज के दर्शन कर वंदना की। उस समय उन्होंने भाव पूर्वक नमन किया।
यह दृश्य विनय संपन्नता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत कर गया। आचार्य श्री से उन्होंने काफी समय तक धर्म चर्चा की, जो वात्सल्यता का जीवंत प्रमाण तो परिलक्षित कर ही रहा था। उस समय मौजूद भक्त काफी भाव विहल हो उठे और इन दृश्यों को एक टक निहारते रहे। संत समागम के ये पल जीवंत जाग्रति लाते हैं और समाज को एक नई दिशा जागृति प्रदान करते हैं। जो युगों-युगों तक एक इतिहास बना देते है। जो अविस्मरणीय पल बनकर सदा-सदा अंकित रहते हैं।











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