आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री समत्व सागर जी महाराज का मुनि श्री शीलसागर जी महाराज के साथ महरौनी नगर में मंगल आगमन हुआ। मुनि संघ के नगर प्रवेश पर जैन समाज द्वारा भव्य मंगल अगवानी की गई। इस अवसर पर विशेष रूप से युवाओं में उत्साह और श्रद्धा का भाव देखने को मिला। महरौनी से पढ़िए, यह खबर…
महरौनी (ललितपुर)। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री समत्व सागर जी महाराज का मुनि श्री शीलसागर जी महाराज के साथ महरौनी नगर में मंगल आगमन हुआ। मुनि संघ के नगर प्रवेश पर जैन समाज द्वारा भव्य मंगल अगवानी की गई। इस अवसर पर विशेष रूप से युवाओं में उत्साह और श्रद्धा का भाव देखने को मिला। मुनि श्री समत्व सागर जी महाराज का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने अमेरिका में प्राप्त एक अच्छी-खासी नौकरी और भौतिक सुख-सुविधाओं को त्याग कर जैन धर्म का पथ अपनाया तथा दिगंबर दीक्षा ग्रहण की। अमेरिका की चकाचौंध भी उन्हें आत्मकल्याण के मार्ग से विचलित नहीं कर सकी। वैभव और ऐश्वर्य को छोड़कर उन्होंने संयम, साधना और त्याग से युक्त मुनि जीवन को स्वीकार किया। धर्मसभा में मुनि श्री समत्व सागर जी महाराज ने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जीवन की विशुद्धि का साधन है। धर्म आचरण से जीवन में संयम, अनुशासन और श्रेष्ठ संस्कार आते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में आधुनिक शिक्षा आवश्यक है लेकिन, उसके साथ-साथ धार्मिक और नैतिक शिक्षा भी उतनी ही अनिवार्य है, क्योंकि वही व्यक्ति के चरित्र और व्यक्तित्व को दिशा देती है।
वंडरफुल जैनिज्म से विदेशों में धर्म प्रचार
मुनिश्री ने युवाओं का आह्वान किया कि वे भौतिक प्रगति के साथ आत्मिक उन्नति को भी जीवन का लक्ष्य बनाएं। मुनिश्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सच्चा सुख बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि आत्मसंयम और समता भाव में निहित है। इसी उद्देश्य से वे वंडरफुल जैनिज्म जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से देश-विदेश में जैन धर्म के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। इस अवसर पर मुनि श्री समत्व सागर जी महाराज को आहारदान देने का सौभाग्य अभिषेक सिंघई ‘टिल्लू’ को प्राप्त हुआ। जिसे समाजजनों ने पुण्य लाभ का अवसर बताया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।













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