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आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का चल रहा है चातुर्मास : टोंक जैन नसिया में बनेगा “आचार्य शांति सागर ध्यान केंद्र”


आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के चातुर्मास के दौरान नगर में धर्म की वर्षा निरंतर हो रही है। समाजजन इस अवसर का पूर्ण लाभ उठाते हुए प्रतिदिन विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं, ताकि चातुर्मास की यह स्मृति चिरस्थायी बनी रहे। इसी क्रम में जैन नसिया परिसर में 20वीं सदी के प्रथमाचार्य आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की दिव्य प्रतिमा के साथ एक भव्य ध्यान केंद्र का निर्माण किया जाएगा। पढ़िए राजेश पंचोलिया की विशेष रिपोर्ट…


टोंक। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के चातुर्मास के दौरान नगर में धर्म की वर्षा निरंतर हो रही है। समाजजन इस अवसर का पूर्ण लाभ उठाते हुए प्रतिदिन विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं, ताकि चातुर्मास की यह स्मृति चिरस्थायी बनी रहे। इसी क्रम में जैन नसिया परिसर में 20वीं सदी के प्रथमाचार्य आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की दिव्य प्रतिमा के साथ एक भव्य ध्यान केंद्र का निर्माण किया जाएगा। इस केंद्र का नाम आचार्य शांति सागर ध्यान केंद्र रखा गया है।

शिलान्यास अवसर पर वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ की पावन उपस्थिति में मंगल मंत्रोच्चार हुआ। आचार्य श्री ने शिलाओं पर केसर से मंगल मंत्र लिखकर शिलान्यास को विधिवत संपन्न कराया। इस पुण्य कार्य का सौभाग्य पुण्यार्जक कलई परिवार—स्व. कजोड़मल जी की धर्मपत्नी कमला देवी एवं सुपुत्र कमलेश कुमार, मेना देवी, बेनी प्रसाद, लक्ष्मी जैन (पूर्व सभापति नगर परिषद टोंक), पवन कुमार, इंद्रादेवी, शेखर कुमार, सुशीला देवी, सम्मेद कुमार, राहुल कुमार, विनायक, अविनाश, पीयूष एवं नमन—ने प्राप्त किया।

समारोह में पवन एवं विकास के अनुसार, श्री आदिनाथ जिनालय नसिया समाज के मंत्री महावीर प्रसाद जैन (देवली वाले), संयुक्त मंत्री टोनी जैन (आंडरा), चातुर्मास कमेटी अध्यक्ष धर्मचंद जैन (दाखिया वाले), राजेश जैन (हाड़ी गांव), पप्पू जैन (नमक वाले), चातुर्मास कमेटी अध्यक्ष भागचंद जैन (फुलेता वाले), राजू सराफ नेमी जी जैन (सिरस वाले) सहित समाज के अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

प्रस्तावित ध्यान केंद्र अत्यंत सुसज्जित एवं भव्य स्वरूप का होगा। यहां साधना और ध्यान के साथ आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की स्मृतियाँ सजीव रहेंगी। यह केंद्र न केवल जैन समाज बल्कि संपूर्ण समाज के लिए आध्यात्मिकता, ज्ञान और साधना का प्रेरणास्रोत बनेगा।

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