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सिरि भूवलय शोध प्रशिक्षण केंद्र के दशम सत्र का शुभारंभ: प्राकृत प्रशिक्षणार्थियों का किया सम्मान 


कुंदकुंद ज्ञानपीठ एवं भारतीय ज्ञान परंपरा उत्कृष्टता केंद्र एसजीएसआइटीएस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सिरि भूवलय शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र के दशम सत्र का शुभारंभ एवं प्राकृत विद्या अध्ययन केंद्र से प्रशिक्षित प्रशिक्षणार्थियों का सम्मान समारोह किया गया। इंदौर से पढ़िए, डॉ. अरविन्द कुमार जैन की यह खबर…


इंदौर। कुंदकुंद ज्ञानपीठ एवं भारतीय ज्ञान परंपरा उत्कृष्टता केंद्र एसजीएसआइटीएस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सिरि भूवलय शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र के दशम सत्र का शुभारंभ एवं प्राकृत विद्या अध्ययन केंद्र से प्रशिक्षित प्रशिक्षणार्थियों का सम्मान समारोह किया गया। जिसमें एसजीएसआइटीएस के निदेशक प्रो. नीतेश पुरोहित मुख्य अतिथि एवं राष्ट्रीय फेडरेशन के अध्यक्ष मनोहरलाल झांझरी अतिथि रुप में उपस्थित रहे। नौवीं सदी में जैन आचार्य श्री कुमुदेंदु रचित ग्रंथराज सिरि भूवलय को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने आठवां आश्चर्य निरुपित किया था। अंक लिपि में रचित सर्वभाषामयी सनातन परंपरा के ज्ञान विज्ञान को इसमें चक्रों के माध्यम से उद्घाटित किया जा सकता है। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य कुमुदेंदु की स्तुतिमय मंगलाचरण से डॉ. उमंग जैन ने किया। इसके बाद भगवान महावीर स्वामी के चित्र के समक्ष अतिथियों ने दीप प्रज्वलन किया।

संस्थाध्यक्ष अमित कासलीवाल ने शताधिक वर्ष की सफलतम यात्रा और संस्था द्वारा चलाए जा रही बहुआयामी गतिविधियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में भारत ही नहीं विश्व के अद्भुत, अद्वितीय, चमत्कारी ग्रंथ सिरि भूवलय के बारे में जानकारी इंजी. अनिलकुमार जैन और ब्रह्मचारी दीदी समता मामोरा ने दी। कार्यक्रम में भूवलय शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र के दशम सत्र के शुभारंभ की घोषणा की गई। सभी भाषाओं की जननी प्राकृत भाषा के महत्व, शोध और अध्ययन की आवश्यकता जानकारी प्रो. संगीता मेहता विभागाध्यक्ष संस्कृत, प्रभारी-भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ ने दी। इस अवसर पर प्राकृत विद्या अध्ययन केंद्र में स्वर्ण, रजत एवं कांस्य पदक प्राप्त तथा अन्य प्रशिक्षित प्रशिक्षणार्थियों का सम्मान किया गया।

सहयोग का दिया भरोसा 

मुख्य अतिथि प्रो. नीतेश पुरोहित ने कहा कि ‘जैन समाज का कोई भी व्यक्ति कोई काम शुरू करता है तो उसकी सफलता की ग्यारंटी होती है’। निःसंदेह निस्वार्थ भाव से किया जा रहे आपके ये कार्य पूर्ण रूप से वांछित सफलता प्राप्त करेंगे। इस अद्भुत कार्य में हम सहयोग करेंगे तो यह हमारा सौभाग्य ही होगा। पांचवीं पीढ़ी के रूप में अमित कासलीवाल का परिवार पूर्ण मनोयोग से धर्म प्रभावना व संस्कृति संरक्षण के कार्य में लगा है। यह निश्चित रूप से प्रशंसनीय है।

 इन्होंने किया संबोधित 

कार्यक्रम में पूर्व कुलपति रेणु जैन, प्रो. ऋषभ फौजदार दमोह,रश्मि जैन जबलपुर, डॉ. अंजना जैन सिहोरा, डॉ. उमंग जैन, डॉ.यतीश जैन जबलपुर, डॉ. रंजना पटोरिया कटनी, डॉ.पूर्णिमा जैन नॉएडा, प्रतिभा जैन कोल्हापुर, शुचिता जैन छिंदवाडा, प्रो. नीरज जैन आदि शीर्षस्थ विद्वानों ने सिरि भूवलय एवं प्राकृत विषयक विचार व्यक्त किए। जस्टिस जे.के. जैन, हंसमुख गांधी, हेमंत पाटनी, अतुल छाबड़ा, डीके जैन, एमके जैन, कुसुम पंड्या, नीरज जैन, स्वप्निल जैन, चंद्रेश जैन, राजीव निराला, प्रियदर्शी जैन, ओम पाटोदी आदि समाज के अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे। संचालन डॉ. अरविंदकुमार जैन (एडमिनिस्ट्रेटर) ने किया। आभार नीरज जैन ने माना।

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