जो गुणी जनों की निंदा करते हैं, वे विघ्न संतोषी हैं। इन कार्यों से सदैव बचें। यह मंगल प्रवचन आर्यिकारत्न विज्ञानमति माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहे। पढ़िए राजीव सिंघाई की रिपोर्ट…
इंदौर। सम्यकदृष्टि जीव निर्भीक होता है। वह उपगूहन अंग का ध्यान रखता है। वह कभी अफवाहें नहीं फैलाता, अगर वह फैलाता है तो सिर्फ धर्म सिर्फ धर्म और सिर्फ धर्म। निंदा करने से नीच गोत्र का बंध होता है, जो गुणी जनों की निंदा करते हैं, वे विघ्न संतोषी हैं। इन कार्यों से सदैव बचें। यह मंगल प्रवचन आर्यिकारत्न विज्ञानमति माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहे।
आर्यिकारत्न विज्ञानमति माताजी सासंघ का चातुर्मास इंदौर के उदयनगर बंगाली में हो रहा है। उदयनगर समिति के पदाधिकारी राकेश जैन पम्पू भैया ने बताया कि प्रतिदिन प्रातः 8:30 बजे से धर्म उदय की स्थली उदयनगर इंदौर में आचार्यकल्प श्री 108 विवेक सागर जी की ज्ञानमंदाकनी, आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज की ज्ञानसरिता भेदविज्ञानी आ. रत्न 105 श्री विज्ञानमती माता जी के बोध गम्य प्रवचन होंगे। इसमें श्रावकजन उपस्थित रहकर धर्मलाभ ले सकते हैं।













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