नादौन जैन स्थानक में आयोजित तप अभिनंदन समारोह में सुश्री भूमि जैन ने 108 एकासन और सुश्री श्रेया जैन ने 68 एकासन कर अद्वितीय तप प्रस्तुत किया। श्रावक संघ एवं समाज ने उन्हें सम्मानित किया। दिनेश मुनि ने तप के महत्त्व और एकासन के लाभों पर प्रवचन दिया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
नादौन जैन स्थानक में भव्य तप अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें समाज की दो बालिकाओं सुश्री भूमि जैन एवं सुश्री श्रेया जैन ने अद्वितीय तप प्रस्तुत किया। सभा के महामंत्री मनोज जैन ने बताया कि 20 वर्षीय सुश्री भूमि जैन ने 108 एकासन और 25 वर्षीय सुश्री श्रेया जैन ने 68 एकासन कर नादौन शहर में प्रेरणास्रोत उदाहरण पेश किया।
इस अवसर पर श्रमण संघीय सलाहकार श्री दिनेश मुनि ने दोनों तपस्विनियों को आशीर्वचन प्रदान किए और कहा कि ऐसा तप समाज में आत्मशुद्धि और धर्म के प्रति निष्ठा का भाव जगाता है। उन्होंने तप और एकासन के महत्त्व को जैन शास्त्रों के आलोक में समझाया। उन्होंने कहा कि “संयमेण तपो लभ्यते, तपसा विगच्छति पापं” — संयम से तप प्राप्त होता है और पापों का नाश होता है। एकासन आत्मसंयम, आत्मशुद्धि और मोक्ष मार्ग की दिशा में बढ़ने का श्रेष्ठ साधन है।
समारोह में जैन संघ के अध्यक्ष रमेश जैन, महामंत्री मनोज जैन, कोषाध्यक्ष रोहित जैन एवं अन्य सदस्यों ने तपस्विनियों का तिलक, माला व उपहार देकर सम्मान किया। सन्मति युवती मंडल की सदस्याओं ने भी उन्हें बहुमानित किया। कार्यक्रम में श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला।
समारोह में ममता जैन व पूजा जैन ने ‘तपस्या की आई है बहार’ गीतिका प्रस्तुत कर सभा को भावविभोर किया। वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि इस प्रकार की साधनाएँ जैन परंपरा की अमर विरासत को जीवंत रखती हैं और युवापीढ़ी के लिए अनुकरणीय उदाहरण हैं। समारोह में लुधियाना, अंबाला, मेरठ, राजपुरा, रायकोट, जालंधर, मुकरियाँ, रोपड़ आदि शहरों से गुरुभक्तों ने उपस्थिति दर्ज करवाई।













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