जैनमंदिर इलाइट क्षेत्र में संतशाला का शिलान्यास
हर कार्य को नियत समय पर ही करें, यह प्रकृति का नियम
ललितपुर. राजीव सिंघई । श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र क्षेत्रपाल मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर के श्रेष्ठ शिष्य
मुनि पुंगव निर्यापक मुनि सुधासागर महाराज ने विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा है कि दुनिया का हर व्यक्ति चाहता है कि वह शान्तिमय, सुखमय और निरोगता का जीवन जिये,परन्तु हम इस तरह का जीवन नहीं जी पा रहे हैं। पाश्चात्य संस्कृति से भावित होकर आज का युवा प्रकृति के विरुद्ध जीवन जी रहा है। रात सोने के लिए और दिन अपने सपनों को पूरा करने के लिए है। पर आज का युवा रात को जागता है और देर रात के बाद सोकर सुबह देर से उठता है।
मुनिश्री ने भारतीय संस्कृति की चर्चा करते हुए कहा कि सूर्योदय से पहले उठना शगुन माना जाता है। इससे हमारे मन- वचन और काय तीनों पवित्र होते हैं। सुबह जल्दी स्नान से शरीर की शुद्धि, वचनों से परमात्मा की पूजा आदि, वचनों की शुद्धि और मन से परमात्मा को याद किया- वह मन की शुद्धि । जल्दी उठने वाले के ये तीनों ही शुद्ध हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि उगते सूर्य को देखने से हमें बहुत सारी एनर्जी मिलती है। अनेकों बीमारियां दूर हो जाती हैं, पर आज हमारी
दिनचर्या ही बिगड़ गई है। रात्रि को देर से सोना और सुबह देर से जागना आज फैशन बन गया है। जबकि प्रकृति के कुछ नियम हैं कि हर कार्य को नियत समय पर ही करना चाहिए। आयुर्वेद भी हमें यही बताता है कि कब सोयें, कब उठें, कब भोजन करें और कब निहार करें। सही समय पर किया गया कार्य ही हमें निरोगता से भर देता है। आज अधिकांश लोग बीमारियों से ग्रसित हैं, जीवन में तनाव है आकुलतायें हैं। यह सब प्रकृति विरुद्ध दिनचर्या का ही परिणाम हैं ।
मुनिश्री सुधासागर महाराज ने घर के अंदर होने वाले क्रियाकलापों की चर्चा करते हुए कहा कि घर के अंदर किये जाने वाले हर कार्य का नियत स्थान है। कहां पूजा कर अपने मन को शुद्ध करना है, कहां भोजन करना है, कहां सोना है, कहां जूते- चप्पल रखना है, कहां कुबेर का स्थान है, कहां पानी का स्रोत है, यहां तककि कहां गुस्सा यानि कोपभवन है, सब कुछ निर्धारित है। पर आज का मानव मनमानी कर रहा है। पूरे घर में जूते- चप्पल पहनकर दौड़ रहा है। कहीं पर भी भोजन, कहीं पर भी पूजा पाठ यानि कोई भी स्थान नियत नहीं है। वास्तु भी हमें यही सब बताता है कि कहां पर कौन सा कार्य करना चाहिए। अगर शान्तिमय जीवन जीना चाहते हो तो विवेकपूर्ण क्रियायें करो। उन्होंने संतों के जीवन को प्रकृति से जोड़कर कहा कि संतों का जीवन प्रकृति के अनुसार होता है। हमारे गुरुवर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने दीक्षा के समय से ही कभी भी रात्रि में लाइट का प्रयोग नहीं किया। शाम को ध्यान के समय जिस तखत पर बैठ गये, सुबह ही उस स्थान से उठते हैं। नियत समय पर आहार- विहार और निहार, दिन में नियत समय 24 घंटे में एक बार भोजन, उसमें भी फल, मेवा, सब्जी,नमक,शक्कर का आजीवन त्याग। बहुत ही सात्विक भोजन करते हैं। उसके बाबजूद जीवन भर पैदल चलते है, हाथों से अपने केशों को उखाड़ते हैं। इतनी कठिनचर्या के बावजूद अपने व्रतों के प्रति उत्साह- उमंग और चेहरे पर बेपनाह
प्रसन्नता और मुस्कराहट जिसको देखकर लाखों लोगों को जीवन की प्रेरणा मिलती है।
मुनिपुंगव के मुखारविन्द से अभिनंदन नाथ भगवान की शान्तिधारा का सौभाग्य आनन्द कुमार, अमित, अंकित पंचमनगर, रवीन्द्र कुमार चंदावली एवं हिसार वालों को प्राप्त हुआ। धर्मसभा का संचालन महामंत्री डा. अक्षय टडैया ने किया।
इसके पूर्व प्रातःकाल श्री दि. जैन पार्श्वनाथ मंदिर इलाइट क्षेत्र में आचार्य श्री विद्यासागर के आशीर्वाद से नियार्पक मुनि पुंगव सुधासागर महाराज, मुनि पूज्य सागर महाराज, एलक धैर्यसागर महाज, क्षुल्लक गंभीर सागर महाराज के मंगल सान्निध्य में भव्य संतशाला का शिलान्यास किया गया। पुण्यार्जक परिवारों में अनिल कुमार डोंगरा, सतीश जैन बंटी आनंद, प्रवीन कुमार कबाड़ी, डा. डीके जैन आस्था, वीरेन्द्र बछरावनी, राजकुमार मोदी खिरिया, पवन कुमार बाबा मार्वल, डा. अवनी कडंकी, शीलचन्द्र विनोद कुमाार बछरावनी, पूरन चन्द चिमरिया एवं नवीन जिनेन्द्र राकेश वैद्य, रवि रतन बजाज, राहुल खजुरिया, नीतेश विलौआ, अमित जैन नाराहट, प्रदीप खिरिया,अनिल जैन नीलू, विजय कुमार चिमरिया परिवार आदि ने उक्त कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दिखाई। कार्यक्रम का संचालन बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश अशोकनगर द्वारा किया गया।
गुरुवार को निर्यापक मुनि श्री सुधासागर महाराज को आहारदान का सौभाग्य भगवानदास राजेश कैलगुवां एवं मुनि पूज्य सागर महाराज को आहारदान अनीता जैन सौरतभर जैन सहेली नीपरी परिवार, एलक धैर्यसागर महाराज को आहारदान पंकज सिमरा परिवार एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज को आहार दान अमित जैन शास्त्री परिवार को मिला।












