भोपाल के अवधपुरी स्थित प्रवचन मंच से मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने कहा कि जीवन में जो कुछ भी घट रहा है उसे सहजता से स्वीकार करें। प्रतिकार, वहिष्कार या सत्कार –...
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यह परिवर्तन विकास की दिशा में हो तो शुभ होता है, परंतु जब जीवन की गति, उद्देश्य और संतुलन नष्ट हो जाए, तब चिंतन आवश्यक हो जाता है। आज की आधुनिक जीवनशैली ने...
आलेख:- डॉ. सुनील जैन संचय ललितपुर। योग की उत्पत्ति प्राचीन समय में योगियों द्वारा भारत में हुई थी। योग का अर्थ है जुड़ना, मन को वश में करना और वृत्तियों से...








