वर्षायोग केवल श्रमणों का नहीं होता है, श्रावकों का भी होता है। जहां पर गुरुओं की वाणी से उनके जीवन में आमूलचूल परिवर्तन आता है। वर्षा योग की सार्थकता तभी है जब...
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आर्यिका रत्न 105 धारणामति, आर्यिका श्री मुदितमति, आर्यिका शास्त्रमति माता जी ससंघ का चातुर्मास नगर की ह्दय स्थली श्री महावीर विद्या विहार में चल रहा है।...
निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि आज अमीरी बहुत बड़ी सजा है कि तुम चाहकर भी भगवान का नाम नहीं ले पा रहे।...
धर्म कहत सब कोई, धर्म न जाने कोई, मर्म जाने बिना धर्म कहां से होई इस उक्ति से आचार्य विहर्ष सागर महाराज ने आज बात प्रारंभ की। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की...
निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि कर्म की अदालत में कोई लेन-देन नहीं करना। हर्ष पूर्वक सजा को ग्रहण करना...
जैन संत आचार्य श्री ज्ञेयसागर महाराज का वर्षायोग ज्ञानतीर्थ क्षेत्र में विभिन्न धार्मिक आयोजनों के साथ सानंद चल रहा है। ज्ञानतीर्थ पर वर्षायोग के लिए विराजित...
निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि महान बनना है तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना। पढ़िए शुभम जैन की...
निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि महान बनना है तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना। जानते हैं उनके...
जो आज तक किया है अब नहीं करेंगे और जो नहीं किया है वो अब करेंगे। ऐसी विचारधारा जब आपकी अंतस चेतना में आयेगी, तब आप कुछ सुखी हो सकते हैं। उक्त उद्बोधन आचार्य...
चातुर्मास के दौरान धर्मसभा में प्रवचन : मनुष्य पर्याय चिंतामणि रत्न के समान हैं -आचार्य विनिश्चयसागर
मनुष्य पर्याय से बढ़कर कोई सौभाग्य नहीं हैं, ये सबसे बड़ा सौभाग्य हैं जो आपको प्राप्त हुआ है। आप इसे महसूस करें तभी आप मानव पर्याय की महत्त्वता समझ सकेंगे।...








