Tag - धर्म प्रवचन

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मुरैना में महावीर निर्वाण लड्डू महोत्सव पर धर्मसभा में गूंजी अहिंसा की अमर वाणी : मुनिश्री विलोकसागरजी ने कहा— स्वयं को जीतना ही असली विजय है

मुरैना में भगवान महावीर स्वामी के मोक्ष कल्याणक महोत्सव पर मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने “जीवो और जीने दो” के सिद्धांत का संदेश देते हुए निर्वाण लड्डू समर्पण...

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नवागढ़ में भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण महोत्सव श्रद्धा एवं भव्यता से संपन्न : अतिशय क्षेत्र में निर्वाण लाडू समर्पण एवं प्रेरक धर्मसभा का आयोजन

नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण महोत्सव क्षेत्र संचालक जयकुमार निशांत भैयाजी के सान्निध्य में भक्ति, अनुष्ठान और प्रेरक प्रवचन के साथ...

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त्याग धर्म का संदेश देते हुए हुआ सामूहिक पूजन और आरती : आगरा जैन मंदिर में मुनियों के अभयदान और त्याग धर्म पर प्रवचन

आगरा के शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, सेक्टर 7 आवास विकास कालोनी सिकंदरा में पर्युषण महापर्व के अवसर पर आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म का आयोजन हुआ। पंडित अंशुल जैन...

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पर्यूषण पर्व के पांचवें दिन युवा विद्वान ने दिए उत्तम सत्य धर्म पर प्रवचन : मधुर वाणी और सत्यवचन से जुड़ें टूटे हृदय, समाज में फैलाएं सौहार्द

तीर्थ स्वरूप दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में पर्यूषण पर्व के पांचवें दिन युवा विद्वान पंडित अंशु भैया ने उत्तम सत्य धर्म पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा...

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अभिमान त्यागने से ही मिलता है आत्मिक सुख और शांति : अहंकार विष के समान, मार्दव धर्म अमृत स्वरूप है – पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी

पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि अहंकार विष के समान है, जो आत्मा को भीतर से खोखला कर देता है, जबकि मार्दव धर्म अमृत स्वरूप है...

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जब मृदुता आती है तभी प्रकट होता है उत्तम मार्दव धर्म – दसलक्षण पर्व का दूसरा दिन : ऐसी पाठशाला होनी चाहिए जिसमें झुकना सिखाया जाए – आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज

रामगंजमंडी में दसलक्षण पर्व का दूसरा दिन उत्तम मार्दव धर्म की पूजा और आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के मंगल प्रवचन के साथ मनाया गया। आचार्य श्री ने कहा कि...

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28 अगस्त से 6 सितंबर तक चलेगा दस दिवसीय दसलक्षण पर्व : मन की मलिनता को निर्मल करते हैं पर्यूषण पर्व – मुनिश्री विबोधसागर

मुरैना में मुनिश्री विबोधसागरजी ने प्रवचन में कहा कि पर्युषण पर्व मन की मलिनता को दूर कर आत्मा को निर्मल बनाने का पर्व है। इस वर्ष पर्व 28 अगस्त से 6 सितंबर तक...

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प्रथमाचार्य शांतिसागर जी की परंपरा पर आधारित संगोष्ठी में आचार्य श्री ने दिया समाज एकता का संदेश : आगम साधु के नेत्र, समाज को धर्म के लिए संगठित होना अनिवार्य – आचार्य वर्धमान सागर जी

आचार्य वर्धमान सागर जी ने टोंक चातुर्मास प्रवचन में कहा कि साधु का जीवन आगम अनुसार होना चाहिए। समाज को संगठित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रथमाचार्य...

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मन और वचन में अंतर तिर्यंच गति का कारण है : मायाचारी से बचना जरूरी है – आचार्य विनिश्चय सागर महाराज

रामगंजमंडी में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने धर्मसभा में प्रवचन देते हुए कहा कि मायाचारी तिर्यंच गति का कारण बनती है। मन में कुछ और वचन में कुछ कहना...

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